6 જાન્યુઆરી ઈતિહાસ

6 જાન્યુઆરી ઈતિહાસ

6 જાન્યુઆરી ઈતિહાસ

6 જાન્યુઆરી ઈતિહાસ

6 જાન્યુઆરી ઈતિહાસ

6 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ Important events of January 6

  • पहली बार दुनिया के सामने एल्फ्रेड वेल और सैम्युएल मोर्स ने विद्युत टेलीग्राफ का 1838 में सफल प्रदर्शन किया। जो भविष्य में दूरसंचार का आधार साबित हुआ।
  • रोमानिया देश 1861 में अस्तित्व में आया।
  • मारिया मॉन्टेसरी ने 1907 में पहला स्कूल और कामकाजी वर्ग के बच्चों के लिए डेकेयर सेंटर खोला जो रोम, इटली में था।
  • एल्फ्रेड वेगेनर ने महाद्वीपीय विस्थापन के सिद्धान्त को 1912 में प्रस्तुत किया।
  • जर्मनी ने फिनलैंड की स्वतंत्रता को 1918 में मान्यता दी।
  • मदर टेरेसा भारत में रोगियों और गरीब लोगों की सेवा करने के लिए 1929 में अब कोलकाता आयी।
  • समाचार पत्रों में प्रतिदिन प्रकाशित कॉमिक स्ट्रिप ‘सुपरमैन’ की शुरुआत 1939 में हुई।
  • वियतनाम में पहले आम चुनाव 1946 में हुए।
  • अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने भारत का विभाजन का विभाजन 1947 में स्वीकार किया।
  • ब्रिटेन ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार को 1950 में मान्यता प्रदान किया।
  • चीन ने लोप नोर क्षेत्र में परमाणु परीक्षण 1976 में किया।
  • रॉक बैंड ‘सेक्स पिस्टल्स’ के सार्वजनिक तौर पर ख़राब बर्ताव की वजह से 1977 में उनके साथ अपना क़रार रद्द कर दिया।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 1983 में पहली बार आंध्र प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।
  • कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्रियों ने 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा के निर्माण की पहली झलक 1987 में देखी।
  • इंदिरा गांधी की हत्या के दोनों दोषियों सतवंत सिंह और केहर सिंह को 1989 में फांसी दी गई।
  • नई दिल्ली में यमुना बैंक-आनंद विहार सेक्शन की मेट्रो रेलों का परिचालन 2010 में आरंभ हुआ।
  • सीरिया की राजधानी दमिश्क में 2012 में हुए आत्मघाती हमले में 26 लोगों की मौत हुई और 63 घायल हुए।

6 जनवरी को जन्मे व्यक्ति – Born on 6 January

  • 1824 में फ़्रांस के लेखक और साहित्यकार एलेग्ज़न्डर डोमा कनिष्ठ का जन्म हुआ।
  • 1910 में भारतीय कर्नाटक संगीतकार जी. एन. बालासुब्रमनियम का जन्म हुआ।
  • 1932 में हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर का जन्म हुआ।
  • 1959 में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव का जन्म हुआ।
  • 1966 में ऑस्कर विजेता भारतीय संगीतकार ए आर रहमान का जन्म हुआ।
  • 1996 में फ़िल्म निर्देशक, अभिनेता किशन श्रीकांत का जन्म हुआ।
  • 1949 में परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सेना के सूबेदार बाना सिंह का जन्म हुआ।
  • 1918 में बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार भरत व्यास का जन्म हुआ।
  • 1913 में पौलैण्ड के प्रथम सचिव एडवर्ड गिरेक का जन्म हुआ।
  • 1883 में विश्व के श्रेष्ठ महाकवि के रूप में ख्याति प्राप्त करने वाले ख़लील जिब्रान का जन्म हुआ।
  • 1928 में भारतीय नाटककार और रंगमंचकर्मी विजय तेंदुलकर का जन्म हुआ।
  • 1940 में प्रसिद्ध लेखक नरेन्द्र कोहली का जन्म हुआ।
  • 1955 में मिस्‍टर बीन के किरदार से दुनिया भर को दीवाना बनाने वाले सर रोवन सेबेस्टियन का जन्‍म।
  • 1965 में राजनीतिज्ञ एवं हिमाचल प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का जन्म हुआ।

6 जनवरी को हुए निधन – Died on 6 January

  • प्रसिद्ध कवि तथा कर्नाटक संगीत के संगीतज्ञ त्यागराज का 1847 में निधन हुआ।
  • नेत्रहीनों के लिये ब्रेल लिपि का
  • निर्माण करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति लुई ब्रेल का 1852 में निधन हुआ।
  • आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रवर्तक का 1885 में निधन हुआ।
  • अमरीका के 26वें राष्ट्रपति थ्योडर रोज़वेल्ट का 1919 में निधन हुआ।
  • भारतीय संगीतकार तथा बाल अभिनेता जयदेव का 1987 में निधन हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक प्रमोद करण सेठी का 2008 में निधन हुआ।
  • जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री जी.एम. शाह का 2009 में निधन हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता ओम पुरी का 2017 में निधन हुआ।

5 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ 

5 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

5 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

 

5 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

  • खाजवाह की लड़ाई में औरंगज़ेब ने शाहशुजा को 1659 में पराजित किया था।
  • छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1671 में मुग़लों से सल्हर क्षेत्र को अपने कब्जे में किया।
  • मास्को शहर में 1731 में पहली बार स्ट्रीट लाइट जलायी गई थी।
  • कैलिफोर्निया स्टॉक एक्सचेंज की शुरूआत 1850 में हुई थी।
  • 1893 में योगगुरू और आध्यात्मिक गुरू श्री योगानन्द जी का जन्म गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
  • आयरलैंड के राष्ट्रवादी नेता जोर्न एडवर्ड रेडमोंड ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह 1900 में किया।
  • चार्ल्स पेरीन ने बृहस्पति ग्रह के सातवें उपग्रह इलारा के खोज की घोषणा 1905 में की।
  • कोलंबिया, पनामा और अमेरिका के बीच में पनामा को स्वतंत्र राज्य बनाने का समझौता 1909 में हुआ।
  • फोर्ड कंपनी के मालिक हेनरी फोर्ड ने अपनी कंपनी के कर्मचारियों का एक दिन का न्यूनतम वेतन 1914 में तय किया।
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल निर्वाचित होने के बाद अमेरिका के पहले आधिकारिक दौरे पर 1952 में अमेरिका पहुँचे।
  • केंद्रीय ब्रिकी कर अधिनियम 1957 में प्रभाव में आया।
  • अमेरिका ने क्यूबा से राजनयिक संबंध 1961 में खत्म किये।
  • भारत में केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम 1970 में अस्तित्व में आया था।
  • पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच 1971 में मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में खेला गया था।
  • बांग्लादेश के नेता शेख मुजीबुर रहमान को 1972 में नजरबंद से आज़ाद कर दिया गया।
  • अंतर्राष्ट्रीय फ़ुटबाल एवं सांख्यिकी महासंघ ने ‘पेले’ को 2000 में शताब्दी का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया।
  • दक्षेस शिखर सम्मेलन काठमाण्डू में 2002 से शुरू, उद्घाटन सत्र में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने भारत के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया पर भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा- ‘भरोसे के लायक़ नहीं।’
  • अल्जीरिया में 2003 में हुए विद्रोहियों के हमले में 43 सैनिक मरे।
  • भारत और नेपाल ने पारगमन संधि की अवधि को 2006 में 3 महीने के लिए बढ़ाया।
  • तंजानिया की विदेश मंत्री आशा रोज मिगरो 2007 में संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव नियुक्त।
  • यूरोपीय संघ (ईयू) ने पाकिस्तान में चुनाव पर्यवेक्षण अभियान पूर्णरूप से 2008 में शुरू किया।
  • नेशनल कांफेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के ये मुख्यमंत्री पद की शपथ 2009 में ली।
  • ‘हरित राजस्थान अभियान’ के तहत डूंगरपुर ज़िला प्रशासन द्वारा ज़िले भर में फैली बंजर पहाड़ियों की हरितिमा लौटाने के लिए 11 व 12 अगस्त 2009 को किए गए 6 लाख से अधिक पौधारोपण की मुहिम को ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में सम्मिलित कर लिया गया।
  • भारतीय संचार उपग्रह जीसैट-14 को 2014 में सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया।
  • जीसैट -14 में भारत में निर्मित क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल हुआ था।

5 जनवरी को जन्मे व्यक्ति – Born on 5 January

  • मुगल शासक शहाबुद्दीन मोहम्‍मद शाहजहां का जन्‍म 1592 में लाहौर ( अब पाकिस्तान ) में हुआ था।
  • भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार बारीन्द्र कुमार घोष का जन्‍म 1880 में हुआ था।
  • भारतीय गुरु परमहंस योगानन्द जी का जन्‍म 1893 में हुआ था।
  • भारतीय जनता पार्टी के नेता मुरली मनोहर जोशी का जन्‍म 1934 में हुआ था।
  • भारतीय खिलाड़ी मंसूर अली ख़ान पटौदी का जन्‍म 1941 में हुआ था।
  • पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जन्‍म 1955 में हुआ था।
  • भारतीय अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का जन्‍म 1986 में हुआ था।
  • प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान, समाज सुधारक, लेखक तथा पालि भाषा के मूर्धन्य विद्वान भदन्त आनन्द कौसल्यायन का जन्‍म 1905 में हुआ था।
  • कवि, साहित्यकार अशोक कुमार शुक्ला का जन्‍म 1967 में हुआ था।
  • स्पेन के राष्ट्रपति थे जॉन कार्लोस प्रथम का जन्‍म 1938 में हुआ था।

5 जनवरी को हुए निधन – Died on 5 January

  • अधिवक्ता ज्ञानेन्द्र मोहन टैगोर का 1890 में निधन।
  • ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड लिनलिथगो का 1952 में निधन।
  • हिन्दी फ़िल्म संगीतकार, गायक और निर्माता-निर्देशक सी. रामचन्द्र का 1982 में निधन।
  • सन 1908 में मैसूर के महाराजा के सहायक सचिव मिर्ज़ा इस्माइल का 1959 में निधन।
  • भारतीय फ़िल्म निर्देशक तथा निर्माता रमेश बहल का 1990 में निधन।

5 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ  – Important events of January 5

  • ઔરંગજેબે 1659 માં ખજાવાહની લડાઇમાં શાહ શુજાને હરાવ્યો હતો.
  • 1671 માં છત્રપતિ શિવાજી મહારાજે મુઘલોના વિસ્તારને અંકુશમાં લીધો હતો.
  • 1731 માં મોસ્કો શહેરમાં પ્રથમ વખત સ્ટ્રીટ લાઇટ્સ પ્રગટાવવામાં આવ્યા હતા.
  • કેલિફોર્નિયા સ્ટોક એક્સચેન્જ 1850 માં શરૂ થયું.
  • 1893 માં, યોગગુરુ અને આધ્યાત્મિક ગુરુ શ્રી યોગનંદજીનો જન્મ ઉત્તર પ્રદેશના ગોરખપુરમાં થયો હતો.
  • આયર્લેન્ડના રાષ્ટ્રવાદી નેતા, જન એડવર્ડ રેડમંડ, 1900 માં બ્રિટીશ શાસન સામે બળવો કર્યો હતો.
  • ચાર્લ્સ પેરીને 1905 માં ગુપ્તી પ્લેનેટની સાતમી સેટેલાઇટ ઇલારા શોધવાની જાહેરાત કરી.
  • કોલંબિયા, પનામા અને યુ.એસ. વચ્ચે પનામાને સ્વતંત્ર રાજ્ય બનાવવાનો કરાર 1909 માં થયો હતો.
  • 1914 માં ફોર્ડ કંપનીના માલિક હેન્રી ફોર્ડે એક દિવસની કંપનીની ન્યૂનતમ વેતન નક્કી કરી હતી.
  • બ્રિટનના વડા પ્રધાન વિન્સ્ટન ચર્ચિલ 1952 માં ભારતની તેમની પ્રથમ સત્તાવાર મુલાકાત વખતે અમેરિકામાં ચૂંટાયા હતા.
  • 1957 માં સેન્ટ્રલ બ્રોકરેજ ટેક્સ એક્ટ અમલમાં આવ્યો.
  • યુએસએ 1961 માં ક્યુબા સાથે રાજદ્વારી સંબંધોનો અંત આવ્યો.
  • 1970 માં ભારતમાં સેન્ટ્રલ સેલ્સ ટેક્સ એક્ટ અસ્તિત્વમાં આવ્યો હતો.
  • ઑસ્ટ્રેલિયાના મેલબોર્નમાં 1971 માં ઑસ્ટ્રેલિયા અને ઇંગ્લેન્ડ વચ્ચેની પ્રથમ ઓડીઆઈ મેચ રમી હતી.
  • બાંગ્લાદેશી નેતા શેખ મુજીબુર રહેમાનને 1972 માં જેલમાંથી છોડવામાં આવ્યો હતો.
  • ઇન્ટરનેશનલ ફૂટબોલ એન્ડ સ્ટેટિસ્ટિક્સ ફેડરેશનએ 2000 માં ‘પેલે’ સદીનો શ્રેષ્ઠ ખેલાડીને જાહેર કર્યો.
  • 2002 માં, કાઠમંડુમાં સાર્ક સમિટના પ્રારંભિક સત્રમાં, પાકિસ્તાનના રાષ્ટ્રપતિ પરવેઝ મુશર્રફે ભારત સાથેની મિત્રતા વધારી હતી, પરંતુ ભારતીય વડા પ્રધાન અટલ બિહારી વાજપેયીએ કહ્યું હતું કે, “ભરોસાના લાયક નથી.”
  • 2003 માં અલ્જેરીયામાં બળવાખોરો દ્વારા થયેલા હુમલામાં 43 સૈનિકો મૃત્યુ પામ્યા હતા.
  • 2006 માં ભારત અને નેપાળે ટ્રાંઝિટનો સમયગાળો 3 મહિના સુધી લંબાવ્યો.
  • તાંઝાનિયન વિદેશ પ્રધાન આશા રોઝ મિગ્રોએ 2007 માં યુએન નાયબ સચિવ જનરલની નિમણૂંક કરી હતી.
  • યુરોપિયન યુનિયન (ઇયુ) એ 2008 માં પાકિસ્તાનમાં ચૂંટણી નિરીક્ષણ અભિયાન શરૂ કર્યું હતું.
  • 200 9 માં નેશનલ કોન્ફરન્સના પ્રમુખ ઓમર અબ્દુલ્લાએ જમ્મુ અને કાશ્મીરના મુખ્યમંત્રી તરીકે શપથ લીધા હતા.
  • ‘ગ્રીન રાજસ્થાન અભિયાન’ હેઠળ, ડુંગરપુર જીલ્લા વહીવટ દ્વારા જિલ્લામાં બેરન ટેકરીઓ પરત કરવા માટે 11 મી અને 12 મી ઑગસ્ટ, 2009 ના રોજ 6 લાખથી વધુ વાવેતરની ઝુંબેશને ગિનિસ બુક ઑફ વર્લ્ડ રેકોર્ડ્સમાં સમાવવામાં આવી હતી. .
  • ભારતીય સંચાર ઉપગ્રહ જીએસએટી -14 2014 માં વર્ગખંડમાં સફળતાપૂર્વક ઇન્સ્ટોલ કરવામાં આવી હતી.
  • જીએસએટી -14 નો ઉપયોગ ક્રાયોજેનિક એન્જિનો બનાવવા માટે ભારતમાં થયો હતો.

5 જાન્યુઆરીના રોજ જન્મેલા – Born on 5 January

  • 1592 માં મોગલ શાસક શાહબુદ્દીન મોહમ્મદ શાહજહાંનો જન્મ લાહોરમાં થયો હતો (હવે પાકિસ્તાનમાં).
  • 1880 માં ભારતના જાણીતા સ્વાતંત્ર્ય સેનાની અને પત્રકાર બૈનંદ કુમાર ઘોષનો જન્મ થયો હતો.
  • ભારતીય ગુરુ પરમહંસ યોગનંદનો જન્મ 1893 માં થયો હતો.
  • 1934 માં ભારતીય જનતા પક્ષના નેતા મુરલી મનોહર જોશીનો જન્મ થયો હતો.
  • 1941 માં ભારતીય ખેલાડી મન્સૂર અલી ખાન પટૌડીનો જન્મ થયો હતો.
  • 1955 માં પશ્ચિમ બંગાળના મુખ્ય પ્રધાન મમતા બેનરજીનો જન્મ થયો હતો.
  • 1986 માં ભારતીય અભિનેત્રી દીપિકા પાદુકોણનો જન્મ થયો હતો.
  • 1905 માં ભડોનાટ આનંદ કૌસાલાયન, પ્રસિદ્ધ બૌદ્ધ વિદ્વાન, સામાજિક સુધારક, લેખક અને પાલી ભાષાના પ્રતિષ્ઠિત વિદ્વાન,નો જન્મ થયો હતો.
  • 1967માં કવિ, સાહિત્યિક આકૃતિકાર, અશોક કુમાર શુક્લાનો જન્મ થયો હતો.
  • 1938 માં સ્પેનના પ્રમુખ જોન કાર્લોસનો જન્મ થયો હતો.

5 જાન્યુઆરીના રોજ મૃત્યુ પામ્યા – Died on 5 January

  • 1890 માં એડવોકેટ જ્ઞાનેન્દ્ર મોહન ટાગોરનું અવસાન થયું.
  • 1952 માં બ્રિટીશ રાજકારણી, લોર્ડ લિનલિથગોનું અવસાન થયું.
  • 1982 માં હિન્દી ફિલ્મ કંપોઝર, ગાયક અને નિર્માતા-દિગ્દર્શક સી. રામચંદ્રનું અવસાન થયું.
  • 1 9 08 માં, મૈસૂરના મહારાજાના સહાયક સચિવ મિર્ઝા ઇસ્માઇલનું 1959 માં અવસાન થયું હતું.
  • 1990 માં ભારતીય ફિલ્મ દિગ્દર્શક અને નિર્માતા રમેશ બીહલનું અવસાન થયું

દીપિકા પાદુકોણ

દીપિકા પાદુકોણ

દીપિકા પાદુકોણ

દીપિકા પાદુકોણ

દીપિકા પાદુકોણ

Deepika Padukone – दीपिका पादुकोण एक भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री और मॉडल है. और वर्तमान में वह फ़िल्म जगत की सबसे और सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री है. उन्होंने हिंदी फिल्मो से ही अपने करियर की शुरुवात की थी और फ़िल्म जगत में उन्हें कई पुरस्कार भी मीले जिनमे तीन फिल्मफेयर अवार्ड भी शामिल है.

दीपिका पादुकोण की कहानी – Deepika Padukone Biography In Hindi

पूरा नामदीपिका प्रकाश पादुकोण
जन्म5 जनवरी 1986
जन्मस्थानडेनमार्क
पिताप्रकाश पादुकोण
माताउज्वला
किशोरावस्था में दीपिका नेशनल लेवल चैंपियनशिप में बॅडमिंटन खेलती थी लेकिन खेलो से अलग होकर उन्होंने अपना करियर मॉडल के रूप में बनाया. मॉडल बनने के कुछ समय बाद ही उन्हें फिल्मो के ऑफर आने लगे और 2006 में उन्होंने कन्नड़ फ़िल्म ऐश्वर्या से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुवात की.

बाद में दीपिका पादुकोण ने उनकी पहली बॉलीवुड फ़िल्म ओम शांति ओम (2007)में शाहरुख़ खान के साथ दोहरी भूमिका अदा की और इसमें उनके शानदार अभिनय के लिये उन्होंने बेस्ट डेब्यू फीमेल केटेगरी में फिल्मफेयर अवार्ड भी जीता. मुख्य महिला भूमिका वाली फ़िल्म लव आज कल (2009) में उनके एक्टिंग की काफी प्रशंसा भी की गयी थी और नाटकीय फ़िल्म लफंगे परिन्दे (2010) में भी उनकी काफी प्रशंसा हुई लेकिन रोमांस फ़िल्म बचना ऐ हसीनो (2008) और अक्षय कुमार के साथ आयी फ़िल्म कॉमेडी हाउसफुल (2010) में उन्हें नकारात्मक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा था.

लेकिन 2012 में आई फ़िल्म कॉकटेल फ़िल्म दीपिका के करियर के लिये टर्निंग पॉइंट साबित हुई, इस फ़िल्म में उनकी भूमिका की काफी प्रशंसा की गयी और साथ ही बहोत से पुरस्कारों और बेस्ट एक्ट्रेस के लिये उनका नाम निर्देशन भी किया गया.

बाद में उन्होंने कॉमेडी यह जवानी है दीवानी (2013), चेन्नई एक्सप्रेस (2013) और हैप्पी न्यू इयर (2014) और इतिहासिक रोमांस बाजीराव मस्तानी (2015) में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका अदा की, जिन्होंने सभी बॉलीवुड रिकार्ड्स ध्वस्त कर दिये.

इसके साथ ही दीपिका ने गोलियों की रासलीला राम-लीला (2013) और पीकू (2015) फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के साथ भी बेहतरीन अभिनय किया इसके लिये उन्हें 2 बेस्ट एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवार्ड भी मिले.

फ़िल्मी करियर के साथ-साथ दीपिका स्टेज शो में भी हिस्सा लेती है, भारतीय अखबारो में लेख भी देती है और साथ ही विविध ब्रांड और उत्पादों का प्रचार भी करती है. 2013 में उन्होंने महिलाओ के लिये खुद ही कपड़ो की रेंज शुरू की और 2015 में उन्होंने “लाइव लव लाफ” संस्था की स्थापना की जिसका उद्देश्य भारत को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाना है.

प्रारंभिक जीवन और करियर – Deepika Padukone film career

दीपिका पादुकोण / Deepika Padukone का जन्म 5 जनवरी 1986 को एक कोंकणी परिवार में डेनमार्क में हुआ था. उनके पिता प्रकाश इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाडी और माता उज्वला एक ट्रेवल एजेंट थी. उनकी छोटी बहन अनिशा एक गोल्फ खिलाडी है. उनके दादा रमेश, मैसूर बॅडमिंटन एसोसिएशन के सेक्रेटरी थे.

बाद में उनका परिवार रहने के लिये बैंगलोर गया, उस समय दीपिका की उम्र सिर्फ 1 साल की ही थी. बैंगलोर की सोफिया हाई स्कूल से उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की और माउंट कारमेल कॉलेज से यूनिवर्सिटी पढाई पूरी की. बाद में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी में वे सोशियोलॉजी में बैचलर ऑफ़ आर्ट की डिग्री हासिल करने के लिये दाखिल हुई लेकिन बाद में मॉडलिंग में करियर बनाने के लिये उन्होंने इसे बिच में ही छोड़ दिया था.

पढाई और खेल में अपना करियर बनाते समय दीपिका चाइल्ड मॉडल की तरह काम करती थी, सबसे पहले 8 साल की उम्र में उन्होंने 2 एडवरटाइजिंग की थी. 2004 में उन्होंने मॉडलिंग को ही अपने करियर के रूप में चुना और प्रसाद बिडप के प्रशिक्षण में मॉडलिंग करने लगी थी.

दीपिका के शुरुवाती करियर में वह उत्पादों और विविध ब्रांड का टेलीविज़न पर प्रचार-प्रसार करती थी. 2005 में उन्होंने लैक्मे फैशन वीक, डिज़ाइनर सुनीत वर्मा से अपने रनवे की शुरुवात की और किंगफ़िशर फैशन अवार्ड्स में “मॉडल ऑफ़ द इयर” का ख़िताब जीता. पादुकोण का करियर में बदलाव तब आया जब किंगफिशर के 2006 के कैलेंडर में डिज़ाइनर वेंडेल रोड्रिक्स ने कमेंट किया था की, “ऐश्वर्या राय के बाद से हमें सुन्दर और नयी और फ्रेश लड़की नहीं मिल रही थी लेकिन अब वह तलाश पूरी हुई.”

और 21 साल की उम्र में पादुकोण मुम्बई में अपनी आंटी के साथ रहने लगी थी. उस साल हिमेश रेशमिया के एल्बम वीडियो “नाम है तेरा” ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलवायी.

और तभी से पादुकोण को फिल्मो के ऑफर आने लगे थे. लेकिन दीपिका खुद को अनुभवहीन अदाकारा मानती थी इसीलिये वे अनुपम खैर फ़िल्म अकैडमी में दाखिल हुई. तभी फवाद खान ने हिमेश रेशमिया का वीडियो देखते हुए दीपिका पादुकोण को हैप्पी न्यू इयर में अभिनेत्री बनाने का निर्णय लिया.

दीपिका पादुकोण फिल्मोग्राफी – Deepika Padukone movie list

ओम शान्ति ओम (2007)

लव आज कल (2009)

कॉकटेल (2012)

यह जवानी है दीवानी (2013)

चेन्नई एक्सप्रेस (2013)

गोलियों की रासलीला रामलीला (2013)

हैप्पी न्यू इयर (2014)

पीकू (2015)

बाजीराव मस्तानी (2015)

दीपिका पादुकोण को मिले हुए अवार्ड-  Deepika Padukone Awards

पादुकोण को 3 फ़िल्मफेयर अवार्ड मिले है-

बेस्ट फीमेल डेब्यू (ओम शान्ति ओम 2007)

दो बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड –

गोलियों की रासलीला रामलीला (2013)

पीकू (2015) के लिये.

Deepika Padukone – દીપિકા પાદુકોણે એક ભારતીય ફિલ્મ અભિનેત્રી અને મોડેલ છે. અને હાલમાં તે વિશ્વના સૌથી વધુ અને ઉચ્ચતમ વેતન આપનાર અભિનેતા છે. તેમણે હિન્દી ફિલ્મો સાથેની કારકિર્દીની શરૂઆત કરી હતી અને ફિલ્મ ઉદ્યોગમાં ત્રણ પુરસ્કારો પણ જીત્યા હતા, જેમાં ત્રણ ફિલ્મફેર એવોર્ડ્સનો પણ સમાવેશ થાય છે.

દીપિકા પાદુકોણ – Deepika Padukone Biography In Gujarati

પુરુ નામદીપિકા પ્રકાશ પાદુકોણ
જન્મ૫ જાન્યુઆરી ૧૯૮૬
જન્મસ્થળડેનમાર્ક
પિતાપ્રકાશ પાદુકોણ
માતાઉજવલા

દીપિકાએ કિશોરાવસ્થામાં નેશનલ લેવલ ચૅમ્પિયનશિપમાં બેડમિંટનની ભૂમિકા ભજવી હતી પરંતુ નાટકથી અલગ પડી અને તેને કારકિર્દી મોડેલ બનાવ્યો. મોડેલ બનાવવામાં આવ્યાના થોડા સમય પછી, તેમને ફિલ્મોની ઓફર મળી, અને 2006 માં, તેણે કન્નડ ફિલ્મ ઐશ્વર્યા સાથેની ફિલ્મ કારકિર્દીની શરૂઆત કરી.ત્યારબાદ , દીપિકા પાદુકોણે તેની પ્રથમ બોલિવુડ ફિલ્મ ઓમ શાંતિ ઓમ (2007) માં શાહરૂખ ખાન સાથે દ્વિ ભૂમિકા ભજવી છે અને તેમને શ્રેષ્ઠ નવોદિત મહિલા તેમના ઉત્કૃષ્ટ કામગીરી માટે ફિલ્મફેર પુરસ્કાર કેટેગરીમાં એવોર્ડ જીત્યો હતો.

મુખ્ય અભિનેત્રીની ભૂમિકા ફિલ્મ લવ પણ આજે (2009) અને નાટક તેમની ભૂમિસ્ટરા બદલ પ્રશંસા કરી હતી પણ તેના નોંધપાત્ર પંક પક્ષીઓ (2010), પરંતુ રોમાંસ ફિલ્મ બચના Hsino (2008) પ્રશંસા અને અક્ષય કુમાર સાથે આવ્યા તેમને કોમેડી હાઉસફુલ (2010) ફિલ્મમાં નકારાત્મક પ્રતિસાદનો સામનો કરવો પડયો હતો.

પરંતુ 2012 ની ફિલ્મ કોકટેલ દીપિકાના કારકિર્દી માટે ટર્નિંગ પોઇન્ટ તરીકે પુરવાર થઈ હતી, તેણીની ભૂમિકાને ફિલ્મમાં ખૂબ જ પ્રશંસા મળી હતી, તેમજ તેનું નામ પુરસ્કાર માટે અને બાહ્ટની શ્રેષ્ઠ અભિનેત્રી માટે નિર્દેશિત કરવામાં આવ્યું હતું.

પાછળથી, તેણે કોમેડીમાં મુખ્ય અભિનેત્રીની ભૂમિકા ભજવી હતી. આ મૂવી દિવાની (2013), ચેન્નઈ એક્સપ્રેસ (2013) અને હેપ્પી ન્યૂ યર (2014) માં અને ઇતિહાસના રોમાંસ બાજીરાવ મસ્તાની (2015) માં મુખ્ય અભિનેત્રી છે, જેમણે બૉલીવુડના તમામ રેકોર્ડ્સ તોડયા હતા.

આ ઉપરાંત, ફિલ્મમાં રામ-લીલા (2013) અને પીકુ (2015) માં અમિતાભ બચ્ચન સાથે શ્રેષ્ઠ અભિનેતા માટે દીપિકાને શ્રેષ્ઠ અભિનેત્રી ફિલ્મફેર પુરસ્કાર પણ મળ્યો હતો.

ફિલ્મ કારકિર્દી ઉપરાંત, દીપિકા સ્ટેજ શોમાં પણ ભાગ લે છે, ભારતીય અખબારોમાં લેખો પણ આપે છે અને વિવિધ બ્રાન્ડ્સ અને ઉત્પાદનોને પ્રોત્સાહન આપે છે. 2013 માં, તેઓએ મહિલાઓ માટે કપડાંની શ્રેણી શરૂ કરી હતી અને 2015 માં તેઓએ “લાઇવ લવ હાસ્ય” સંસ્થાની સ્થાપના કરી હતી જેનું લક્ષ્ય ભારતને માનસિક રીતે સ્વસ્થ બનાવવું છે.

પ્રારંભિક જીવન અને કારકિર્દી- Deepika Padukone film career

દીપિકા પાદુકોણનો જન્મ 5 જાન્યુઆરી, 1986 ના રોજ ડેનમાર્કના કોંકણી પરિવારમાં થયો હતો. તેમના પિતા પ્રકાશ ઇન્ટરનેશનલ બેડમિંટન ખેલાડી અને માતા ઉજાવાલા એક ટ્રાવેલ એજન્ટ હતા. તેની નાની બહેન અનિશા એક ગોલ્ફ ખેલાડી છે. તેમના દાદા રમેશ, મૈસુર બેડમિંટન એસોસિએશનના સચિવ.

પાછળથી, તેમનો પરિવાર બેંગ્લોર ગયો, તે સમયે, દીપિકાની ઉંમર માત્ર એક વર્ષ જૂની હતી. તેમણે બેંગ્લોરમાં સોફિયા હાઇસ્કૂલથી પ્રાથમિક શિક્ષણ લીધું અને માઉન્ટ કાર્મેલ કૉલેજમાંથી યુનિવર્સિટી અભ્યાસ પૂર્ણ કર્યું. પાછળથી, ઈન્દિરા ગાંધી નેશનલ ઓપન યુનિવર્સિટીમાં, તેમણે બેચલર ઑફ આર્ટ્સની ડિગ્રી મેળવવા માટે સમાજશાસ્ત્રમાં પ્રવેશ કર્યો, પરંતુ બાદમાં મોડેલિંગમાં કારકીર્દિ બનાવવા માટે તે મધ્યમાં ગયો.

તેની કારકિર્દીનો અભ્યાસ કરતી વખતે અને રમતા કરતી વખતે દીપિકાએ બાળ મોડેલ તરીકે અભિનય કર્યો હતો, પ્રથમ તેણીએ 8 વર્ષની ઉંમરે 2 જાહેરાતો હતી. 2004 માં, તેમણે મોડેલિંગની કારકિર્દી તરીકે પસંદગી કરી અને પ્રસાદ બિડની તાલીમમાં મોડેલિંગ શરૂ કર્યું.

દીપિકાની પ્રારંભિક કારકિર્દીમાં તે ટેલિવિઝન પર ઉત્પાદનો અને વિવિધ બ્રાંડનો પ્રચાર કરતી હતી. 2005 માં તેઓ લેક્મે ફેશન વીક, તેમના રનવે વર્મા અને કિંગફિશર ફેશન એવોર્ડ્સ ડિઝાઇનર Sunit શરૂઆત, “વર્ષની શ્રેષ્ઠ મોડલ” જીત્યો હતો. કારકિર્દી પાદુકોણે ફેરફારો આવ્યા હતા જ્યારે 2006 કૅલેન્ડર કિંગફિશર વેન્ડેલ રોડ્રીગ્સે માં ડિઝાઇનર ટિપ્પણી કરી હતી, “પછી ઐશ્વર્યા રાય હતી અમને દંડ અને નવા અને તાજા છોકરી શોધી શકતા નથી પરંતુ હવે તે માટે પૂર્ણ થાય છે જોઈ છે.”

અને 21 વર્ષની ઉંમરે, પાદુકોણેએ મુંબઈમાં તેની કાકી સાથે રહેવાનું શરૂ કર્યું. હિમેશ રેશમિયાના આલ્બમ “નામા હૈ તેરા” તે વર્ષે, તે ખૂબ જ પ્રખ્યાત બન્યો.

ત્યારથી, ફિલ્મોની ઓફર દીપિકા પાદુકોણમાં આવી રહી હતી. પરંતુ દીપિકાએ પોતાની જાતને એક અયોગ્ય અભિનેત્રી ગણાવી, તેથી તેણી અનુપમ ખાન ફિલ્મ એકેડમીમાં ગઈ. ફવાદ ખાન, હિમેશ રેશમિયાના વીડિયો જોતા, હેપી ન્યુ યરમાં દીપિકા પાદુકોણને અભિનેત્રી બનાવવાનું નક્કી કર્યું.

દીપિકા પાદુકોણ ફિલ્મોગ્રાફી- Deepika Padukone movie list

ઓમ શાંતિ ઓમ (૨૦૦૭)

લવ આજકાલ (૨૦૦૯)

કુકટેલ(૨૦૧૨)

યે જવાની હે દીવાની (૨૦૧૩)

ચેન્નઈ એક્સપ્રેસ(૨૦૧૩)

રામલીલા (૨૦૧૩)

હેપીન્યુયર(૨૦૧૪)

પીકુ(૨૦૧૫)

બાજીરાવ મસ્તાની (૨૦૧૫)

દીપિકા પાદુકોણ પુરસ્કાર – Deepika Padukone Awards

પાદુકોણેને 3 ફિલ્મફેર એવોર્ડ મળ્યો છે

શ્રેષ્ઠ સ્ત્રી ડેબ્યુટ (ઓમ શાંતિ ઓમ 2007)

બે શ્રેષ્ઠ અભિનેત્રી પુરસ્કારો –
રામલીલા (2013) બુલેટ્સ શૉટ
પીકુ (2015) માટે

ઔરંગઝેબનો ઇતિહાસ

ઔરંગઝેબનો ઇતિહાસ

ઔરંગઝેબનો ઇતિહાસ

ઔરંગઝેબનો ઇતિહાસ

ઔરંગઝેબનો ઇતિહાસ

पूरा नाम अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर. Aurangzeb – Alamgir
जन्मस्थान  दाहोद (गुजरात)
पिता  शाहजहां
माता मूमताज महल
विवाह बेगम नवाब बाई, औरंगाबादी महल, उदयपुरी महल, झैनाबदी महल

औरंगजेब का इतिहास –

औरंगजेब का जन्म गुजरात के दाहोद गाव में हुआ। शाह जहाँ और मूमताज महल के वो तीसरे बेटे थे। 26 फेब्रुअरी 1628 में जब शाहजहा ने लिखित तौर पर ये बताया की औरंगजेब ही उनके तख़्त के काबिल है। इसके बाद औरंगजेब को बाहर युद्ध विद्या सिखने भेजा गया, और युद्ध कला में निपुण होने के बाद वे फिर से अपने परिवार के साथ रहने लगे।

शाह जहाँ जब बूढ़े होकर बीमार हो गये तो औरंगजेब – Aurangzeb ने उन्हें कैद में डाला। कुछ इतिहास

शाह जहाँ ताजमहल पर पूरा मुग़ल ख़जाना खर्च कर रहें थे इसीलिए उन्हें कैद में डाला गया। शाहजहां की मौत कैदखाने में हुई। इस तरह वे हिन्दुस्तान के एकछत्र सम्राट बन गये।

औरंगजेब के पूर्वज अकबर, बाबर आदी शासकों ने भारत को जो समृध्दि प्रदान की थी, औरंगजेब ने उसमें वृध्दि तो अवश्य की परन्तु अपने कट्टरपन तथा अपने पिता और भाइयों के प्रति दुर्व्यवहार के कारण उन्हें देश की जनता का विरोध भी मोल लेना पड़ा।

उन्होंने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया। वैसे नैतिक रूप से वे अच्छे चरित्र के व्यक्ति थे। वे टोपियां सीकर और कुरान की आयतें लिखकर अपना खर्चा चलाते थे। उन्होंने राज्य-विस्तार के लिए अनेक बड़ी-बड़ी लड़ाईयां लड़ीं।

उनका शासन 1658 से लेकर उनकी मृत्यु 1707 तक चला। उन्होंने 48 साल तक अपना शासन स्थापीत रखा।

औरंगजेब का राज्य बहोत ही विस्तृत था इस वजह से उस समय मुघल साम्राज्य सबसे विशाल और शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था। औरंगजेब के पुरे जीवन में उसने अपना राज्य दक्षिण में 3.5 लाख किलोमीटर तक विस्तृत किया और जिसमे 150-200 लाख लोग उसके राज्य में रहने लगे थे।

जब मुघल साम्राज्य युद्ध कर रहा था तभी अचानक एक लड़ाकू हाती ने उनके शरीर पर प्रहार किया, जिससे उन्हें कई दिनों तक चोटिल रहने के बाद भी वे युद्ध में लड़ते रहे, युद्ध का लगभग पूरा क्षेत्र हतियो से भरा पड़ा था और लड़ते-लड़ते ही अंत में उन्हें मृत्यु प्राप्त हुई। और उनकी इसी बहादुरी से प्रेरित होकर उन्हें बहादुर का शीर्षक दिया गया।

अंतिम युद्ध में कमजोर पड़ने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी थी। वे मुघल साम्राज्य के एक निडर योद्धा थे। उनका हमेशा से ऐसा मानना था की अगर आप बिना लड़ेही शत्रु की ताकत देखकर ही हार मान लेते हो तो फिर आपसे बुरा कोई नहीं।

इसमें संदेह नहीं कि औरंगजेब मुगल सल्तनत के महान सम्राट थे और उनका समय मुग़ल-साम्राज्य की समृध्दि की समृध्दि का स्वर्णिम युग था।

उनकी मृत्यु के 15-16 वर्ष बाद ही मुगल-साम्राज्य का सितारा डूब गया। बाबर के खानदान के इस अंतिम मुगल सम्राट The last Mughal को अनेक कारणों से याद किया जाता है। बाबर जहां भारत में मुगल-साम्राज्य के संस्थापक थे, वहां औरंगजेब मुगल-साम्राज्य की समाप्ति का कारण बने।

औरंगज़ेब के निर्माण:

  1. औरंगज़ेब नेलाहौर की बादशाही मस्जिद बनवाई थी।
  2. 1678 ई. में औरंगज़ेब ने अपनी पत्नी रबिया दुर्रानी की स्मृति में बीबी का मक़बरा बनवाया।
  3. औरंगज़ेब ने दिल्ली के लाल क़िले में मोती मस्जिद बनवाई थी।

औरंगजेब इतिहास के सबसे सशक्त और शक्तिशाली राजा माने जाते थे। उन्होंने पुरे भारत को अपने साम्राज्य में शामिल करने की कोशिश की।

પૂરૂ નામઅબુલ મુજફર મુહુદ્દીન ઔરંગજેબ આલમગીર Aurangzeb – Alamgir
જન્મ સ્થળદાહોદ (ગુજરાત)
પિતાશાહજહા
માતામુમતાઝ મહેલ
વિવાહબેગમ નવાબ બા, ઔરંગાબાદી મહેલ ઉદયપુરી મહેલ, ઝૈનાબાદી પેલેસ

ઔરંગઝેબનો ઇતિહાસ –

ઔરંગઝેબનો જન્મ ગુજરાતના દાહોદ ગામમાં થયો હતો. તેઓ શાહજહાં અને મુમતાઝ મહેલના ત્રીજા પુત્ર હતા. 26 ફેબ્રુઆરી 1628 ના રોજ, જ્યારે શાહજહાંએ લખ્યું હતું કે ઔરંગઝેબ તેના પટ્ટા માટે સમર્થ હતા. આ ઔરંગઝેબને યુદ્ધ જ્ઞાન શીખવવા માટે મોકલવામાં આવ્યા પછી, અને યુદ્ધના મુખ્ય હોવાના પછી, તેણે ફરી પોતાના પરિવાર સાથે રહેવાનું શરૂ કર્યું.

જ્યારે શાહજહાં વૃદ્ધ થયા પછી બીમાર પડી, ઔરંગજેબે તેને જેલમાં મુક્યો. કેટલાક ઇતિહાસ

શાહજહાં સમગ્ર મુઘલ ટ્રેઝરીને તાજમહલ પર ખર્ચ કરી રહ્યા હતા જેથી તેને કેદ કરવામાં આવે. જેલમાં શાહજહાંની હત્યા થઈ. આ રીતે તેઓ ભારતના રાજા બન્યા.

ઔરંગઝેબના પિતા અકબર બાબર ટેવાયેલા રાજાઓએ ભારતમાં જે સમૃદ્ધિ પૂરી પાડે છે ઔરંગઝેબ જણાવ્યું હતું કે વૃદ્ધિમાં થવું જોઈએ, પરંતુ તેમના ઝનૂન ખરીદી અને તેમના પિતા અને ભાઇઓ ગેરવર્તન કારણે દેશમાં જાહેર પ્રતિકાર હતી.

તેઓએ હિન્દુઓ પર જિજિયા કર લીધો. તે રીતે, તે નૈતિક રીતે સારા વ્યક્તિ હતા. તેઓ કેપ અને કુરાનના ટોપીઓ લખીને તેમનો પૈસા ખર્ચતા હતા. રાજ્યના વિસ્તરણ માટે તેઓએ ઘણી મોટી લડાઇ લડયા.

તેનું શાસન 1658 થી 1707 સુધી તેની મૃત્યુ સુધી હતું. તેમણે 48 વર્ષ સુધી તેમનો શાસન રાખ્યો.

ઔરંગઝેબનું રાજ્ય ખૂબ વિસ્તૃત હતું કારણ કે મુઘલ સામ્રાજ્ય તે સમયે સૌથી મોટું અને શક્તિશાળી સામ્રાજ્ય માનવામાં આવતું હતું. ઔરંગઝેબના આજીવન દરમ્યાન, તેમણે દક્ષિણમાં 3.5 લાખ કિલોમીટર સુધીનો વિસ્તાર વિસ્તાર્યો હતો, જેમાં 150-200 લાખ લોકો તેમના રાજ્યમાં રહેતા હતા.

જ્યારે મુઘલ સામ્રાજ્ય લડાઇ કરતો હતો, ત્યારે અચાનક એક સૈનિકએ તેના શરીરને આક્રમણ પર લીધો, જેના કારણે તે ઘણા દિવસો સુધી ઇજાગ્રસ્ત થયો, તેણે યુદ્ધમાં લડાઈ ચાલુ રાખી, યુદ્ધનો સમગ્ર વિસ્તાર શસ્ત્રો અને લડાઈથી ભરાયો. અંતે તે મૃત્યુ પામ્યો તેમની બહાદુરીથી પ્રેરિત, તેમને બહાદુરનું શિર્ષક આપવામાં આવ્યું.

અંતિમ યુદ્ધની નબળી પડી હોવા છતાં, તેણે હાર સ્વીકારી ન હતી. તે મુઘલ સામ્રાજ્યનો નિર્ભય યોદ્ધા હતો. તે હંમેશાં માનતો હતો કે દુશ્મનની તાકાત સામે લડ્યા વિના તમે લડશો નહીં, તો પછી તમને કોઈ નુકસાન નહીં થાય.

તેમના મૃત્યુના 15-16 વર્ષ પછી મુઘલ સામ્રાજ્યનો તારો ડૂબી ગયો હતો. આ છેલ્લા મુઘલ સમ્રાટ, બાબરના પરિવારના છેલ્લા મુઘલને અનેક કારણોસર યાદ કરવામાં આવે છે. જ્યારે બાબર ભારતમાં મુઘલ સામ્રાજ્યના સ્થાપક હતા, ત્યારે ઔરંગઝેબ મુઘલ સામ્રાજ્યના અંત માટેનું કારણ બન્યું.

ઔરંગઝેબની ઇમારતો:

  1. ઔરંગઝેબ નાલ્હોરના રાજા મસ્જિદનું નિર્માણ કરી રહ્યું હતું.
  2. 1678 એડીમાં, ઔરંગજેબે તેની પત્ની રબીયા દુર્રાનીની યાદમાં બિબીનું મકબરો બનાવ્યું હતું.
  3. ઔરંગજેબે દિલ્હીના લાલ કિલ્લામાં મોતી મસ્જિદનું નિર્માણ કર્યું

स्वतंत्रता सेनानी “अब्दुल घफ्फार खान”

स्वतंत्रता सेनानी “अब्दुल घफ्फार खान”

स्वतंत्रता सेनानी “अब्दुल घफ्फार खान”

स्वतंत्रता सेनानी “अब्दुल घफ्फार खान”

स्वतंत्रता सेनानी “अब्दुल घफ्फार खान”

Bacha Khan – बच्चा खान (बादशाह खान – Badshah Khan) जिनका पूरा नाम अब्दुल घफ्फार खान – Khan Abdul Ghaffar Khan है। जो ब्रिटिश राज के खिलाफ लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे। वे एक राजनितिक और आध्यात्मिक नेता थे, जो अपनी अहिंसक विरोध के लिए जाने जाते थे। महात्मा गांधी के करीबी मित्र बच्चा खान का नाम ब्रिटिश भारत में “सीमावर्ती गांधी – Frontier Gandhi” रखा गया।

स्वतंत्रता सेनानी “अब्दुल घफ्फार खान” – Khan Abdul Ghaffar Khan

बच्चा खान का जन्म 6 फरवरी 1890 को शांतिपूर्ण और समृद्ध पश्तून परिवार में, ब्रिटिश भारत की पेशावर घाटी के उत्मंजाई में हुआ था। उनके पिता बेहरम खान हाश्तनाघर के जमींदार थे। बच्चा खान बेहरम के दुसरे बेटे थे, जिन्होंने ब्रिटिशो द्वारा चलाई जाने वाली एडवर्ड मिशन स्कूल से प्राथमिक शिक्षा हासिल की। उस समय उनके क्षेत्र में मिशनरियो द्वारा चलाई जाने वाली यह एकमात्र सर्वसम्पन्न स्कूल थी।

स्कूल की पढाई में बच्चा खान होशियार थे और उनके गुरु रेवरेंड विग्राम से वे काफी प्रभावित होते थे। उन्ही से उन्होंने समय में शिक्षा के महत्त्व को जाना था।

10 वी और हाई स्कूल के अंतिम वर्ष में उन्हें प्रतिष्ठित आयोग में जाने की पेशकश की गयी थी, जो ब्रिटिश भारतीय सेना का ही एक भाग था। लेकिन खान को जब यह पता चला की आयोग में मार्गदर्शन अधिकारी को भी उनके देश में द्वितीय श्रेणी का नागरिक समझा जाता है, तो इसीलिए उन्होंने इस आयोग में जाने से इंकार कर दिया।

इसके बाद उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी की पढाई शुरू रखी और रेवरेंड विग्राम ने भी उन्हें उनके भाई अब्दुल जब्बर खान के साथ लन्दन में पढने की पेशकश की। जबकि बच्चा यादव की माँ नही चाहती थी की उनका बेटा लन्दन जाए। इसीलिए बच्चा खान अपने पिता की जमींदारी के व्यवसाय में ही उनकी सहायता करने लगे।

अब्दुल घफ्फार खान की निजी जिंदगी – Khan Abdul Ghaffar Khan Personal Life

1912 में उन्होंने मेहरक़न्दा से शादी की, जो यार मोहम्मद खान की बेटी थी। उनके दो बेटे, एक अब्दुल घनी खान और दुसरे अब्दुल वाली खान और एक बेटी सरदारों थी। दुर्भाग्यवश उनके पत्नी की मृत्यु 1918 में ही हो गयी।

इसके बाद 1920 में उन्होंने उनकी पहली पत्नी की की बहन नम्बता से शादी कर ली। उन्हें एक बेटी और एक बेटा भी है। लेकिन 1926 में फिर से उनके जीवन में दुःखद घटना घटी और घर की सीढियों से गिरते हुए उनकी दूसरी पत्नी की भी मृत्यु हो गयी। इसके बाद युवा होने के बावजूद घफ्फार ने दोबारा शादी करने से इंकार कर दिया।

1910 में 20 साल की उम्र में खान ने अपने घरेलु स्थान उत्मंजाई में एक मदरसे की शुरुवात की। 1911 में तुरंग्जाई के स्वतंत्रता सेनानी हाजी साहिब के स्वतंत्रता अभियान में शामिल हो गये।

1915 में ब्रिटिश अधिकारियो ने मदरसों पर बंदी लगा दी थी। ब्रिटिश राज के खिलाफ बार-बार मिल रही असफलता की वजह से खान ने सामाजिक गतिविधियाँ और सुधार करने का निर्णय लिया, जो पश्तून समुदाय के लिए भी लाभदायक साबित हुआ। इसी की वजह से 1921 में अंजुमन-ए-इस्लाह-ए-अफघानिया और 1927 में पश्तून असेंबली की स्थापना की गयी।

मई 1928 में मक्का मदीना से वापिस आने के बाद उन्होंने पश्तून भाषा की स्थापना की। और फिर अंततः नवम्बर 1929 में खान ने खुदाई खिदमतगार (भगवान के दास) अभियान की स्थापना की। जसकी सफलता के चलते ब्रिटिश अधिकारी उनका और उनके समर्थको का विरोध करने लगे। भारतीय स्वतंत्रता अभियान में उन्होंने जमकर ब्रिटिश राज का सामना किया था।

खान ने भारत के विभाजन की मांग करने वाली ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का जमकर विरोध किया था। लेकिन जब भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस ने खुदाई खिदमतगार के नेताओ से बातचीत किए बिना ही विभाजन की अनुमति जाहिर कर दी, तो उन्हें बहुत बुरा लगा।

विभाजन के बाद भारत या पाकिस्तान में जाने की बजाये, जून 1947 में खान और दुसरे खुदाई खिदमतगारो – Khudai Khidmatgar ने मिलकर बन्नू आंदोलन (संकल्प) की घोषणा की, जिसमे उन्होंने मांग की के पश्तून को अपना खुद का आज़ाद पश्तुनिस्तान राज्य चुनने की अनुमति दे दी जाए, जिसमे ब्रिटिश भारत के सभी पश्तून प्रदेशो को शामिल किया जाना था। लेकिन ब्रिटिश राज ने उनकी इन मांगो को मानने से साफ़ इंकार कर दिया था।

विभाजन के बाद खान ने पाकिस्तान से बदला लेने की भी कोशिश की लेकिन जल्द ही पाकिस्तान सरकार ने उन्हें 1948 और 1954 के बीच गिरफ्तार कर लिया। 1956 में एक इकाई कार्यक्रम का विरोध करने के बाद उन्हें पुनः गिरफ्तार किया गया। 1960 से 1970 के बीच खान ने अपना ज्यादातर समय जेल में ही व्यतीत किया था।

खान अब्दुल गफ़र खान महत्वपूर्ण कार्य  – Khan Abdul Ghaffar Khan Important Work

1910 में वे जब केवल 20 साल थे तब उन्होंने अपने निजी स्थान पर मकबरे की स्थापना की। वे एक सैद्धांतिक और आदर्शवादी युवा इंसान थे, जो शिक्षा के प्रति अपने विचारो को दुनियाभर में फैलाते थे।

1911 में वे पश्तून स्वतंत्रता सेनानी हाजी साहिब के स्वतंत्रता अभियान में शामिल हो गये।

1915 में ब्रिटिश अधिकारियो ने उनके मदरसों पर बंदी लगा दी थी। इससे दुखी होकर भी घफ्फार निरुत्साहित नही हुए। इसकें बाद वे सामाजिक कार्य और सुधार करने के कार्यो में लग गए।

इसके बाद वे भारतीय स्वतंत्रता अभियान के मुख्य नेता महात्मा गांधी से मिले और गांधीजी के अहिंसात्मक तत्वों का उनपर काफी प्रभाव पड़ा। गांधीजी से प्रेरित होकर रोलेट एक्ट के समय वे भी राजनीती में शामिल हो गये।

1920 में वे खिलाफत आंदोलन में शामिल हो गए, जिनका मुख्य उद्देश्य भारतीय मुस्लिमो का तुर्किश सुल्तान से सबंध करवाना था। इसके अगले साल उन्हें खिलाफत समीति का जिला अध्यक्ष बना दिया गया।

1921 में ‘अंजुमन-ए-इस्लाह-ए-अफघानिया’ और 1927 में पश्तून असेंबली की स्थापना में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

1929 में आयोजित भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस की सभा में भी वे शामिल थे और इसके तुरंत बाद उन्होंने खुदाई खिदमतगार उर्फ़ ‘लाल शर्ट अभियान’ की स्थापना कर दी। भारतीय स्वतंत्रता अभियान के समर्थन में किया जाने वाला यह एक अहिंसात्मक आंदोलन था।

1930 में उन्होंने गांधीजी से अच्छी मित्रता बना ली थी और जल्दी ही वे गांधीजी के मुख्य सलाहकारों में से एक बन चुके थे। उनका लाल शर्ट अभियान कांग्रेस पार्टी का समर्थन कर रहा था।

1947 में विभाजन के समय तक उन्होंने गांधीजी के साथ मिलकर काम किया। घफ्फार विभाजन के बिल्कुल विरोध में थे, उन्होंने संयुक्त सेक्युलर राष्ट्र की कल्पना कर रखी थी।

विभाजन के बाद वे पाकिस्तान में रहने लगे जहाँ वे पश्तून के अधिकारों के लिए लड़ने लगे। सक्रीय भारतीय होने की वजह से कई बार उनकी निंदा भी की जाती थी।

1948 और 1956 के बीच एकल इकाई योजना का विरोध करने और दूसरी गतिविधियों के चलते भी उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया।

इसके बाद कमजोर स्वास्थ के चलते उन्हें 1964 में ईलाज के लिए यूनाइटेड किंगडम जाना पड़ा, जहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें यूनाइटेड स्टेट जाने की सलाह भी दी थी। इसके बाद वे निर्वासन के लिए अफ़ग़ानिस्तान चले गये और 1972 में निर्वासन के बाद लौटकर वापिस आए। अगले साल मुल्तान की सरकार के प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद कुछ सालो तक वे राजनीती से दूर रहे। 1985 में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस द्वारा मनाये जा रहे शताब्दी महोत्सव के लिए वे भारत आए थे।

खान अब्दुल गफ़र खान को दिए गयें अवार्ड – khan abdul ghaffar khan awards:

1962 में उन्हें एमनेस्टी इंटरनेशनल प्रिजनर ऑफ़ कॉनसाइंस ऑफ़ दी इयर में प्रस्तुत किया गया।

1967 में अंतरराष्ट्रीय समझ के लिए उन्हें जवाहरलाल नेहरु अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

1987 में उन्हें भारत के सर्वोच्च अवार्ड ‘भारत रत्न अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था। यह अवार्ड पाने वाले वे पहले गैर भारतीय थे।

खान अब्दुल घफ्फार खान की मृत्यु – Khan Abdul Ghaffar Khan Death:

अपने जीवन का ज्यादातर समय उन्होंने सामाजिक और राजनितिक गतिविधियों में ही व्यतीत किया। इस प्रकार 20 जनवरी 1988 को 97 साल की उम्र में पेशावर में उनकी मृत्यु हो गयी।

1988 में पेशावर में उनकी मृत्यु के बाद उनकी इच्छानुसार उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद में उनके घर पर दफनाया गया। दस हज़ार से भी ज्यादा लोग उनके अंतिम संस्कार में शोक मानाने पहुचे थे, लेकिन यात्रा के दौरान हुए दो बम विस्फोटो की वजह से 15 लोग मारे भी गये थे।

શાહજહાંનો ઇતિહાસ

શાહજહાંનો ઇતિહાસ

શાહજહાંનો ઇતિહાસ

શાહજહાંનો ઇતિહાસ

શાહજહાંનો ઇતિહાસ

पूरा नामअल् आजाद अबुल मुजफ्फर शाहब उद-दीन मोहम्मद
जन्म५ जनवरी १५९२
जन्मस्थानखुर्रम, लाहौर, पाकिस्तान
पिताजहाँगीर
माताताज बीबी बिलक़िस मकानी

विवाह     – अरजुमंद बानू बेगम उर्फ मुमताज महल इनके साथ विवाह और भी कन्दाहरी बेग़म अकबराबादी महल, हसीना बेगम, मुति बेगम, कुदसियाँ बेगम, फतेहपुरी महल, सरहिंदी बेगम, श्रीमती मनभाविथी इनके साथ.

सन्तान / Son Of Shahjahan –  पुरहुनार बेगम, जहांआरा बेगम, दारा शिकोह, शाह शुजा, रोशनारा बेगम, औरंग़ज़ेब, मुराद बख्श, गौहरा बेगम

शाहजहाँ का इतिहास – History Of Shahjahan

अपने पराक्रमो से आदिलशाह और निजामशाह के प्रस्थापित वर्चस्वो को मु तोड़ जवाब देकर सफलता मिलाने वाला राजा के रूप में शाहजहाँ की पहचान होती है। वैसेही खुदकी रसिकता को जपते हुये कलाकारों के गुणों को प्रोत्साहन देने वाला और ताजमहल जैसी अप्रतिम वास्तु खड़ी करने वाला ये राजा था।

पारसी भाषा, वाड़:मय, इतिहास, वैदिकशास्त्र, राज्यशास्त्र, भूगोल, धर्म, युद्ध और राज्यकारभार की शिक्षा शहाजहान उर्फ राजपुत्र खुर्रम इनको मिली। इ.स. 1612 में अर्जुमंद बानू बेगम उर्फ मुमताज़ महल इनके साथ विवाह हुवा। उनके विवाह का उन्हें राजकारण में बहोत उपयोग हुवा।

शाहजहाँ बहोत पराक्रमी थे। आदिलशहा, कुतुबशहा ये दोनों भी उनके शरण आये। निजामशाह की तरफ से अकेले शहाजी भोसले ने शाहजहाँ से संघर्ष किया। लेकिन शहाजहान के बहोत आक्रमण के वजह से शहाजी भोसले हारकर निजामशाही खतम हुयी। भारत के दुश्मन कम हो जाने के बाद शहाजहान की नजर मध्य आशिया के समरकंद के तरफ गयी। लेकिन 1639-48 इस समय में बहोत खर्चा करके भी वो समरकंद पर जीत हासिल कर नहीं सके।

विजापुर और गोवळ कोंडा इन दो राज्यों को काबू में लेकर उसमे सुन्नी पथो का प्रसार करने के लिये औरंगजेब को चुना गया। पर औरंगजेब ने खुद के भाई की हत्या कर के बिमार हुये शाहजहाँ को कैद खाने में डाल दिया। वही जनवरी 1666 में उनकी दुर्देवी मौत हुयी।

शाहजहाँ का नाम ‘ताजमहल’ इस अप्रतिम कलाकृति के वजह से भी यादो में रहता है। मुमताज़ महल इस अपनी बेगम के यादो में उन्होंने ये वास्तु बनवायी थी। उस समय इस वास्तु को बनवाने के लिये छे करोड़ रुपये खर्च आया।

संगमवर के पत्थरों का इस्तेमाल ही शहाजहान निर्मित इस भव्य ईमारत की खासीयत है। इसके लिये उन्होंने इटालियन Techniques की भी मदत ली। मोती मस्जिद, दिल्ली का लाल किला ये भी उन्होंने बनवाई हुयी वास्तु है। ताजमहल इस सुंदर ख्वाब के तरफ देखते हुये उन्होंने अपनी आखरी सॉस ली।

औरंगज़ेब का इतिहास 

औरंगज़ेब का इतिहास

औरंगज़ेब का इतिहास

औरंगज़ेब का इतिहास

औरंगज़ेब का इतिहास

पूरा नामअबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर. Aurangzeb – Alamgir
जन्मस्थानदाहोद (गुजरात)
पिताशाहजहां
मातामूमताज महल
विवाहबेगम नवाब बाई, औरंगाबादी महल, उदयपुरी महल, झैनाबदी महल

औरंगजेब का इतिहास – Aurangzeb History in Hindi

औरंगजेब का जन्म गुजरात के दाहोद गाव में हुआ। शाह जहाँ और मूमताज महल के वो तीसरे बेटे थे। 26 फेब्रुअरी 1628 में जब शाहजहा ने लिखित तौर पर ये बताया की औरंगजेब ही उनके तख़्त के काबिल है। इसके बाद औरंगजेब को बाहर युद्ध विद्या सिखने भेजा गया, और युद्ध कला में निपुण होने के बाद वे फिर से अपने परिवार के साथ रहने लगे।=

शाह जहाँ जब बूढ़े होकर बीमार हो गये तो औरंगजेब – Aurangzeb ने उन्हें कैद में डाला। कुछ इतिहासकरों का ऐसा कहना है की –

शाह जहाँ ताजमहल पर पूरा मुग़ल ख़जाना खर्च कर रहें थे इसीलिए उन्हें कैद में डाला गया। शाहजहां की मौत कैदखाने में हुई। इस तरह वे हिन्दुस्तान के एकछत्र सम्राट बन गये।

औरंगजेब के पूर्वज अकबर, बाबर आदी शासकों ने भारत को जो समृध्दि प्रदान की थी, औरंगजेब ने उसमें वृध्दि तो अवश्य की परन्तु अपने कट्टरपन तथा अपने पिता और भाइयों के प्रति दुर्व्यवहार के कारण उन्हें देश की जनता का विरोध भी मोल लेना पड़ा।

उन्होंने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया। वैसे नैतिक रूप से वे अच्छे चरित्र के व्यक्ति थे। वे टोपियां सीकर और कुरान की आयतें लिखकर अपना खर्चा चलाते थे। उन्होंने राज्य-विस्तार के लिए अनेक बड़ी-बड़ी लड़ाईयां लड़ीं।

उनका शासन 1658 से लेकर उनकी मृत्यु 1707 तक चला। उन्होंने 48 साल तक अपना शासन स्थापीत रखा।

औरंगजेब का राज्य बहोत ही विस्तृत था इस वजह से उस समय मुघल साम्राज्य सबसे विशाल और शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता था। औरंगजेब के पुरे जीवन में उसने अपना राज्य दक्षिण में 3.5 लाख किलोमीटर तक विस्तृत किया और जिसमे 150-200 लाख लोग उसके राज्य में रहने लगे थे।

जब मुघल साम्राज्य युद्ध कर रहा था तभी अचानक एक लड़ाकू हाती ने उनके शरीर पर प्रहार किया, जिससे उन्हें कई दिनों तक चोटिल रहने के बाद भी वे युद्ध में लड़ते रहे, युद्ध का लगभग पूरा क्षेत्र हतियो से भरा पड़ा था और लड़ते-लड़ते ही अंत में उन्हें मृत्यु प्राप्त हुई। और उनकी इसी बहादुरी से प्रेरित होकर उन्हें बहादुर का शीर्षक दिया गया।

अंतिम युद्ध में कमजोर पड़ने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी थी। वे मुघल साम्राज्य के एक निडर योद्धा थे। उनका हमेशा से ऐसा मानना था की अगर आप बिना लड़ेही शत्रु की ताकत देखकर ही हार मान लेते हो तो फिर आपसे बुरा कोई नहीं।

इसमें संदेह नहीं कि औरंगजेब मुगल सल्तनत के महान सम्राट थे और उनका समय मुग़ल-साम्राज्य की समृध्दि की समृध्दि का स्वर्णिम युग था।

उनकी मृत्यु के 15-16 वर्ष बाद ही मुगल-साम्राज्य का सितारा डूब गया। बाबर के खानदान के इस अंतिम मुगल सम्राट The last Mughal को अनेक कारणों से याद किया जाता है। बाबर जहां भारत में मुगल-साम्राज्य के संस्थापक थे, वहां औरंगजेब मुगल-साम्राज्य की समाप्ति का कारण बने।

औरंगज़ेब के निर्माण:

औरंगज़ेब नेलाहौर की बादशाही मस्जिद बनवाई थी।

1678 ई. में औरंगज़ेब ने अपनी पत्नी रबिया दुर्रानी की स्मृति में बीबी का मक़बरा बनवाया।

औरंगज़ेब ने दिल्ली के लाल क़िले में मोती मस्जिद बनवाई थी।

औरंगजेब इतिहास के सबसे सशक्त और शक्तिशाली राजा माने जाते थे। उन्होंने पुरे भारत को अपने साम्राज्य में शामिल करने की कोशिश की।

4 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

4 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

4 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

4 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

4 જાન્યુઆરીનો ઈતિહાસ

જાન્યુઆરી 4 ની મહત્વની ઘટના  – Important events of January 4

  • ઈંગ્લેન્ડના રાજા ચાર્લ્સે 1642 માં 400 સૈનિકો સાથે સંસદ પર હુમલો કર્યો હતો.
  • 1762 માં ઈંગ્લેન્ડએ સ્પેન અને નેપલ્સ પર યુદ્ધ જાહેર કર્યું.
  • દક્ષિણ આફ્રિકાએ ઈંગ્લેન્ડને 1 વિકેટથી હરાવ્યો હતો અને 1906માં પ્રથમ ટેસ્ટ જીત્યું હતું.
  • કિંગ જ્યોર્જ પંચમએ 1906 માં કલકત્તા (હવે કોલકાતા) માં વિક્ટોરિયા મેમોરિયલ હોલનો પાયો નાખ્યો હતો.
  • 1932 માં બ્રિટીશ ઇસ્ટ ઇન્ડિઝના વાઇસરોય વિલિંગડન દ્વારા મહાત્મા ગાંધી અને જવાહરલાલ નેહરુની ધરપકડ કરવામાં આવી હતી.
  • 1948 માં બર્મા (હવે મ્યાનમાર)એ બ્રિટનથી સ્વતંત્રતા જાહેર કરી.
  • ચીનની સલામતી દળોએ 1951 માં કોરિયન યુદ્ધ દરમિયાન સિઓલ પર કબજો મેળવ્યો. 1962 માં ન્યૂયોર્ક સિટી ઑફ અમેરિકામાં પ્રથમ ઓટોમેટિક (માનવરહિત) મેટ્રો ટ્રેન ચાલી હતી.
  • 1 9 72 માં નવી દિલ્હીમાં ક્રિમિનલ અને ફોરેન્સિક વિજ્ઞાન સંસ્થાનું ઉદઘાટન.
  • 1 99 0 માં પાકિસ્તાનમાં બે ટ્રેનની અથડામણમાં લગભગ 400 લોકો માર્યા ગયા હતા અને 547 ઘાયલ થયા હતા.
  • બાંગ્લાદેશે 1998 માં ભારતને ઉલ્ફાના મહાસચિવ અનુરૂપ ચેતિયા સમક્ષ આત્મસમર્પણ કરવાનો ઇનકાર કર્યો હતો.
  • 1999માં ગ્રહ પર વરાળના વિશ્લેષણ માટે અમેરિકન યાન મંગળ પોઝ લેન્ડર પ્રોબ’નું પ્રસ્થાન.
  • 2004 માં, વડા પ્રધાન અટલ બિહારી વાજપેયી અને પાકિસ્તાની વડા પ્રધાન ઝફર ઉલાહ ખાનબ જમાલી વચ્ચે ઇસ્લામાબાદમાં વાટાઘાટો યોજાઇ હતી.
  • 2008 માં, યુ.એસ.એ શ્રીલંકાને લશ્કરી સાધનો અને સેવાઓની સપ્લાય પર પ્રતિબંધ મૂક્યો હતો.
  • પીપલ્સ ડેમોક્રેટીક પાર્ટીએ 200 9 માં યુપીએ સાથેના સંબંધોને તોડ્યો હતો.
  • ભારતના સ્ટોક એક્સચેન્જ બોર્ડ ઓફ ઇન્ડિયાના હુકમના આધારે સવારે 9 વાગ્યે શેરબજારના પ્રારંભિક કલાકો જાહેર કરવામાં આવ્યા હતા.

4 જાન્યુઆરીના રોજ જન્મેલા –  Born on 4 January

  • 1643 માં પ્રસિદ્ધ ભૌતિકશાસ્ત્રી આઇઝેક ન્યૂટનનો જન્મ થયો હતો.
  • 1809 માં, દૃષ્ટિથી વિકલાંગ લોકો માટે બ્રેઇલ લેખનની શોધ કરનાર લૂઇ બ્રેઇલનો જન્મ થયો હતો.
  • 1892 માં એક ભારતીય અર્થશાસ્ત્રી જે.સી. કુમારપ્પાનો જન્મ થયો હતો.
  • 1924 માં ધાર્મિક વિચારક સેબાસ્ટિયન કપ્પેનનો જન્મ થયો હતો.
  • 1925 માં, કવિ ગોપાલ દાસ નીરજનો જન્મ થયો હતો.
  • 1931 માં અભિનેત્રી નિરુપા રોયનો જન્મ થયો હતો.
  • 1965 માં અભિનેતા આદિત્ય પંચોલીનો જન્મ થયો હતો.
  • 1988 માં ભારતીય લેખક નાબીલા જમશેદનો જન્મ થયો હતો.
  • 1925 માં પ્રખ્યાત અભિનેતા પ્રદીપ કુમારનો જન્મ થયો હતો.
  • 1887 માં પ્રખ્યાત લેખક લોભાન પ્રસાદ પાંડેનો જન્મ થયો હતો.
  • 1952 માં, વર્તમાન મુખ્ય ન્યાયમૂર્તિ, ભારતના 43 માં ન્યાયમૂર્તિ, ટી. એસ. ઠાકુરનો જન્મ થયો.

4 જાન્યુઆરીના રોજ મૃત્યુ પામ્યા – Died on 4 January

  • 4 જાન્યુઆરી, 1931 ના રોજ, પ્રખ્યાત પત્રકાર અને ભારતના સ્વાતંત્ર્ય સેનાની મોહમ્મદ અલીનું અવસાન થયું હતું.
  • 4 જાન્યુઆરી 1983 ના રોજ, જબ્બરમલ શર્માનું અવસાન થયું, જે રાજસ્થાનના અનુભવી સાહિત્યિક પત્રકાર અને ઇતિહાસકાર હતા.
  • 4 મી જાન્યુઆરી, 1905 ના રોજ, અયોધ્યા પ્રસાદ ખત્રીનું અવસાન થયું જે વર્ટિકલ ક્વોટના જાણીતા કવિ હતા.
  • 4 જાન્યુઆરી, 1994 ના રોજ, રાહુલ દેવ બર્મન (આર. ડી. બર્મન)નું મૃત્યુ થયું જે હિન્દી ફિલ્મોના જાણીતા સંગીતકાર હતા.
  • શેખમક્તુમ બિન રશીદ અલ મક્તૂમ, જે 4 જાન્યુઆરી, 2006 ના રોજ મૃત્યુ પામ્યા હતા તે દુબઇના શાસક હતા.
  • 4 જાન્યુઆરી, 2016માં એચ. કાપડિયા, જે ભારતના 38 માં મુખ્ય ન્યાયમૂર્તિ હતા તે મૃત્યુ પામ્યા.

4 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ – Important events of January 4

  • इंग्लैंड के किंग चार्ल्स ने 1642 में 400 सैनिकों के साथ संसद पर हमला किया।
  • इंग्लैंड ने स्पेन और नेपल्स पर 1762 में युद्ध की घोषणा की।
  • दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड को एक विकेट से हराकर अपनी पहली टेस्ट जीत 1906 में हासिल की।
  • किंग जार्ज पंचम ने कलकत्ता (अब कोलकाता) के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल की आधारशिला 1906 में रखी।
  • ब्रिटिश ईस्ट इंडीज के वायसराय विलिंगडन ने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू को 1932 में गिरफ्तार किया।
  • बर्मा (अब म्यांमार) ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता की घोषणा 1948 में की।
  • चीन के सुरक्षाबलों ने कोरियाई युद्ध के दौरान सियोल पर 1951 में कब्जा किया।
  • अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में पहली स्वचालित (मानवरहित) मेट्रो ट्रेन 1962 में चली।
  • नई दिल्ली में इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिमिनालॅजी एंड फारेंसिक साइंस का उद्घाटन 1972 में हुआ।
  • पाकिस्तान में 1990 में दो ट्रेनों की टक्कर में करीब 400 लोग मारे गए और लगभग 547 घायल हुए।
  • बंग्लादेश ने भारत को 1998 में उल्फा महासचिव अनूप चेतिया को सौंपने से इनकार किया।
  • मंगल ग्रह पर भाप का विश्लेषण करने हेतु अमेरिकी यान ‘मार्स पौसर लैंडर प्रोब’ का 1999 में प्रस्थान।
  • भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जफर उल्ला खान जमाली के बीच 2004 में इस्लामाबाद में वार्ता आयोजित।
  • अमेरिका ने 2008 में श्रीलंका को सैन्य उपकरणों और सेवाओं की आपूर्ति पर रोक लगाई।
  • पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने 2009 में यूपीए से नाता तोड़ा।
  • भारत में स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के आदेश पर 2010 में शेयर बाज़ारों के खुलने का समय एक घंटा पहले सुबह 9 बजे कर दिया गया।

4 जनवरी को जन्मे व्यक्ति – Born on 4 January

  • 1643 में मशहूर भौतिक विज्ञानी आइजक न्‍यूटन का जन्‍म हुआ।
  • 1809 में नेत्रहीनों के लिये ब्रेल लिपि का आविष्कार करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति लुई ब्रेल का जन्म हुआ।
  • 1892 में भारत के एक अर्थशास्त्री जे.सी. कुमारप्पा का जन्‍म हुआ।
  • 1924 में धार्मिक विचारक सेबास्तियन कप्पेन का जन्‍म हुआ।
  • 1925 में कवि गोपाल दास नीरज का जन्‍म हुआ।
  • 1931 में अभिनेत्री निरुपा रॉय का जन्‍म हुआ।
  • 1965 में अभिनेता आदित्य पंचोली का जन्‍म हुआ।
  • 1988 में भारतीय लेखक नाबिला जमशेद का जन्‍म हुआ।
  • 1925 में हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता प्रदीप कुमार का जन्‍म हुआ।
  • 1887 में प्रसिद्ध साहित्यकार लोचन प्रसाद पाण्डेय का जन्‍म हुआ।
  • 1952 में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश, भारत के 43वें न्यायाधीश टी. एस. ठाकुर का जन्‍म हुआ।

4 जनवरी को हुए निधन – Died on 4 January

  • 4 जनवरी 1931 को मोहम्मद अली का निधन जो भारत के प्रसिद्ध पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • 4 जनवरी 1983 को झाबरमल्ल शर्मा का निधन जो राजस्थान के वयोवृद्ध साहित्यकार, पत्रकार एवं इतिहासकार थे।
  • 4 जनवरी 1905 को अयोध्याप्रसाद खत्री का निधन खड़ी बोली के प्रसिद्ध कवि थे।
  • 4 जनवरी 1994 को राहुल देव बर्मन (आर. डी. बर्मन) का निधन हिन्दी फिल्मों के मशहूर संगीतकार थे।
  • 4 जनवरी 2006 को शेखमकतूम बिन रशीद अल मकतूम का निधन जो दुबई के शासक थे।
  • 4 जनवरी 2016 को एस. एच. कपाड़िया का निधन जो भारत के 38वें मुख्य न्यायाधीश थे।

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल

पूरा नामलुइस ब्रेल
जन्म4 january 1809
जन्मस्थानपश्चिमी पेरिस (फ्रांस)
पितासाइमन
माता   मोनिक्यु

“THE LESS WE SEE WITH OUR EYES, THE MORE WE SEE OUR HEARTS…”

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल – Louis Braille Biography In Hindi

लुइस ब्रेल एक फ्रेंच शिक्षक और अन्धो के लिये ब्रेल लिपि का अविष्कार करने वाले महान व्यक्ति थे. उनकी इस लिपि को पुरे विश्व में ब्रेल के नाम से जाना जाता है. जन्म से ही ब्रेल किसी अपघात की वजह से दोनों आँखों से अंधे थे, लेकिन किशोरावस्था में ही उन्होंने अपनी इस कमजोरी में मास्टरी हासिल कर ली थी. पढाई में ब्रेल को काफी रूचि थी और अंधे होने की वजह से फ्रांस के रॉयल इंस्टिट्यूट की तरफ से उन्हें स्कालरशिप भी मिलती थी. और विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने उन्होंने अन्धो के लिये कोड भाषा का विकास करना शुरू कर दिया था ताकि अंधे लोग आसानी से पढ़-लिख सके. मिलिट्री क्रिप्टोग्राफ़ी चार्ल्स बरबीर से उन्हें काफी प्रेरणा मिली. ब्रेल ने अन्धो की जरुरतो को समझते हुए उनके लिये कुछ करने की ठानी. 1824 में पहली बार उन्होंने उनके द्वारा कीये गये कार्य का प्रदर्शन किया था.

युवावस्था में ब्रेल ने उसी इंस्टिट्यूट में प्रोफेसर के पद पर रहते हुए सेवा की और म्यूजिशियन के पद पर भी रहते हुए उन्होंने काफी लुफ्त उठाया लेकिन अपनी ज़िन्दगी का ज्यादातर समय उन्होंने अपनी ब्रेल लिपि को विकसित करने में लगाया. उनकी मृत्यु के काफी समय बाद तक उनकी लिपि को ज्यादा लोगो ने उपयोग नही किया था लेकिन बाद में उनकी इस लिपि का इतना विकास हुआ की उनकी इस खोज को क्रांतिकारी अविष्कार माना गया. और बाद में पुरे विश्वमे अन्धो की जरुरतो को समझते हुए उनकी इस ब्रेल लिपि को अपनाया गया था.

लुइस ब्रेल का प्रारंभिक जीवन – Louis Braille Life History :

लुइस ब्रेल / Louis Braille का जन्म फ्रांस के कूपवराय में हुआ था जो पश्चिमी पेरिस से 20 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है,  उनकी माता मोनिक्यु और पिता साइमन-रेने के साथ कुछ हेक्टर्स जमीन पर रहते थे. उनके पिता साइमन एक सफल और प्रसिद्ध उद्योगपति थे.

जैसे-जैसे ब्रेल बड़े होते गये वैसे-वैसे वे अपना ज्यादातर समय अपने पिता के साथ बिताने लगे थे. और तीन साल की उम्र में ब्रेल कुछ औजारो के साथ भी खेलने लगे थे, जिसमे कभी-कभी वे चमड़े के टुकड़े में सुई की सहायता से छेद करने की भी कोशिश करते थे.

एक दिन काठी के लिये लकडी को काटते समय इस्तेमाल किया जाने वाला चाकू अचानक उछल कर नन्हें लुइस की आंख में जा लगा और बालक की आँख से खून की धारा बह निकली. रोता हुआ बालक अपनी आंख को हाथ से दबाकर सीधे घर आया और घर में साधारण जडी लगाकर उसकी आँख पर पट्टी कर दी गयी. शायद यह माना गया होगा कि लुइस अभी छोटा है इसके चलते शीघ्र ही चोट अपनेआप ठीक हो जायेगी. बालक लुइस की आंख के ठीेक होने की प्रतीक्षा की जाने लगी. कुछ दिन बाद बालक लुइस को अपनी दूसरी आंख से भी कम दिखलायी देने की शिकायत की परन्तु यह उसके पिता साइमन की लापरवाही जिसके चलते बालक की आँख का समुचित इलाज नहीं कराया जा सका और धीरे धीरे वह नन्हा बालक पाँच वर्ष का पूरा होने तक पूरी तरह दृष्टि हीन हो गया.

रंग बिरंगे संसार के स्थानपर उस बालक के लिये सब कुछ गहन अंधकार में डूब गया. अपने पिता के चमडे के उद्योग में उत्सुकता रखने वाले लुई ने अपनी आखें एक दुर्घटना में गवां दी. यह दुर्घटना लुइस के पिता की कार्यशाला में घटी. जहाँ तीन वर्ष की उम्र में एक लोहे का सूजा लुई की आँख में घुस गयी.

इसके बाद किशोरावस्था से युवावस्था तक लुइस को आगे बढ़ने में काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा था, इसके चलते उनके माता-पिता उनका काफी ध्यान भी रखते थे. किसी लकड़ी की सहायता से वे अपने गाव के रास्तो को ढुंढने की कोशिश करते थे और इसी तरह वे बड़े होते गये. लेकिज ब्रेल का दिमाग काफी गतिशील था उन्होंने अपने विचारो से स्थानिक शिक्षको और नागरिको को आकर्षित कर रखा था और वे उच्चतम शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे.

लुइस ब्रेल की शिक्षा – Louis Braille Education :

ब्रेल ने 10 साल की उम्र तक कूपवराय में ही शिक्षा प्राप्त की क्योकि दिमागी रूप से तो वे काफी सशक्त थे लेकिन शारीरक रूप से वे दृष्टी हीन थे. ब्रेल ने दृष्टिहीन लोगो के लिये बनी दुनिया की पहली स्कूल रॉयल इंस्टिट्यूट फॉर ब्लाइंड युथ से शिक्षा ग्रहण की जिसे बाद में नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ब्लाइंड युथ, पेरिस नाम दिया गया था. उनके परीवार को छोड़ने वाले ब्रेल पहले इंसान थे, अपने परीवार को छोड़ते हुए वे फेब्रुअरी 1819 में स्कूल में चले गए. उस समय रॉयल इंस्टिट्यूट की स्थापना नही हुई थी, लेकिन फिर भी स्कूल में दृष्टिहीन लोगो को पर्याप्त सुविधाये दी जाती थी. ताकि वे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सके.

ब्रेल सिस्टम – Braille System Information :

ब्रेल अपनी दृष्टिहीनता की वजह से अन्धो के लिये एक ऐसे सिस्टम का निर्माण करना चाहते थे जिससे उन्हें लिखने और पढ़ने में आसानी हो और आसानी से वे एक-दूजे से बात कर सके. उनके अपने शब्दों में-

ब्रेल लिपि के जनक लुइस ब्रेल

Braille Script In Hindi

“बातचीत करना मतलब एक-दूजे के ज्ञान हो समझना ही है और दृष्टिहीन लोगो के लिये ये बहोत महत्वपूर्ण है और इस बात को हम नजर अंदाज़ नही कर सकते. उनके अनुसार विश्व में अन्धो को भी उतना ही महत्त्व दिया जाना चाहिए जितना साधारण लोगो को दिया जाता है.”

लेकिन जीते जी उनके इस अविष्कार का महत्त्व लोगो को पता नही चला लेकिन उनकी मृत्यु के बाद केवल पेरिस ही नही बल्कि पुरे विश्व के लिये उनका अविष्कार सहायक साबित हुआ.

भारत सरकार ने सन 2009 में लुइस ब्रेल के सम्मान में डाक टिकिट जारी किया है. लूइस द्वारा किये गये कार्य अकेले किसी राष्ट्र के लिये न होकर सम्पूर्ण विश्व की दृष्ठिहीन मानव जाति के लिये उपयोगी थे अतः सिर्फ एक राष्ट् के द्वारा सम्मान प्रदान किये जाने भर से उस महात्मा को सच्ची श्रद्वांजलि नहीं हो सकती थी. विगत वर्ष 2009 में 4 जनवरी को जब लुइस ब्रेल के जन्म को पूरे दो सौ वर्षों का समय पूरा हुआ तो लुइस ब्रेल जन्म द्विशती के अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनः पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जब इस अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया.

यह शायद पहला अवसर नहीं है जब मानव जाति ने किसी महान आविष्कारक के कार्य को उसके जीवन काल में उपेक्षित किया और जब वह महान आविष्कारक नहीं रहे तो उनके कार्य का सही मूल्यांकन तथा उन्हें अपेक्षित सम्मान प्रदान करते हुये अपनी भूल का सुधार किया. ऐसी परिस्थितियां सम्पूर्ण विश्व के समक्ष अक्सर आती रहती हैं जब किसी महानआत्मा के कार्य को समय रहते ईमानदारी से मूल्यांकित नहीं किया जाता तथा उसकी मृत्यु के उपरान्त उसके द्वारा किये गये कार्य का वास्तविक मूल्यांकन हो पाता है. ऐसी भूलों के लिये कदाचित परिस्थितियों को निरपेक्ष रूप से न देख पाने की हमारी अयोग्यता ही हो सकती है.

पंडित जवाहरलाल नेहरू

पंडित जवाहरलाल नेहरू

पंडित जवाहरलाल नेहरू

पंडित जवाहरलाल नेहरू

आज़ादी के लिये लड़ने वाले और संघर्ष करने वाले मुख्य महापुरुषों में से जवाहरलाल नेहरु एक थे। उन्हें हम पंडित जवाहरलाल नेहरु – Pandit Jawaharlal Nehru या चाचा नेहरु – Chacha Nehru के नाम से जाने जाते थे। जिन्होंने अपने भाषणों से लोगो का दिल जीत लिया था। इसी वजह से वे आज़ाद भारत के सबसे पहले प्रधानमंत्री भी बने। इस महान महापुरुष के जीवन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी।

जवाहरलाल नेहरु जीवनी – Jawaharlal Nehru Biography

पूरा नामजवाहरलाल मोतीलाल नेहरु
जन्मतिथि14 नवम्बर 1889
जन्मस्थानइलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
पितामाता – स्वरूपरानी नेहरु
पत्नीकमला नेहरु (सन् 1916)
बच्चेश्री मति इंदिरा गांधी जी
शिक्षा1910 में केब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनटी कॉलेज से उपाधि संपादन की। 1912 में ‘इनर टेंपल’ इस लंडन कॉलेज से बॅरिस्ट बॅरिस्टर की उपाधि संपादन की।
पत्नीकमला नेहरु (सन् 1916)
मृत्यु27 मई 1964, नई दिल्ली
मृत्यु का कारणदिल का दौरा
पुरस्कारभारत रत्न (1955)
प्रधानमंत्री का पदभारत के प्रथम प्रधानमन्त्री (15 अगस्त 1947 – 27 मई 1964 )

पंडित जवाहर लाल नेहरू का जीवन परिचय – Jawaharlal Nehru Information

“विफलता तभी मिलती है, जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं।”

-पं. जवाहर लाल नेहरू

आदर्शवादी, और सिधान्तिक छवि के महानायक थे पंडित जवाहरलाल नेहरू उनका मानना था कि जो इंसान अपने उद्देश्य, सिद्धांत और आदर्शों को भूल जाते हैं तो उन्हें सफलता हाथ नहीं लगती।

पंडित जवाहर लाल नेहरू एक ऐसे राजनेता थे जिन्होनें अपने व्यक्तित्व का प्रकाश हर किसी के जीवन पर डाला है। यही नहीं पंडित नेहरू एक समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के वास्तुकार भी माने जाते थे।

पंडित नेहरू को आधुनिक भारत का शिल्पकार भी कहा जाता था। उन्हें बच्चों से अत्याधिक लगाव था इसलिए बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कहकर बुलाते थे। इसलिए उनके जन्मदिन को भी “बालदिवस – Children’s Day” के रूप में मनाया जाता है।

उनका कहना था कि

“नागरिकता देश की सेवा में निहित होती हैं ।”

इसी सोच के बल पर उन्हें आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके साथ ही वे एक आदर्शवादी और महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होनें गुलाम भारत को आजाद दिलवाने में महात्मा गांधी का साथ दिया था।

नेहरू जी में देशभक्ति की भावना शुरु से ही थी साथ ही उनके जीवन से कई सीख सीखने को मिलती है वे सभी के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं।

पंडित जवाहर लाल नेहरू का शुरुआती जीवन – Jawaharlal Nehru Early Life

महान लेखक,विचारक और कुशल राजनेता जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीरी ब्राहाण परिवार में 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में जन्म लिया था। पंडित नेहरू के पिता का नाम पंडित मोतीलाल नेहरू था जो कि मशहूर बैरिस्टर औऱ समाजसेवी थे और उनकी माता का नाम श्रीमती स्वरूप रानी था।। जो कि कश्मीरी ब्राहाण परिवार से तालुक्कात रखती थी।

जवाहर लाल नेहरू के तीन भाई-बहन थे जिसमें नेहरू जी सबसे बड़े थे। नेहरू जी की बड़ी बहन का नाम विजया लक्ष्मी था जो कि बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी जबकि उनकी छोटी बहन का नाम कृष्णा हठीसिंग था जो कि एक अच्छी और प्रभावशाली लेखिका था।

उन्होनें अपने भाई पंडित नेहरू के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कई किताबें भी लिखी थी।

आपको बता दें कि पंडित नेहरू जन्म से ही तेज दिमाग के और ओजस्वी महापुरुष थे। वे जिससे भी एक बार मिल लेते थे वह उनसे प्रभावित हो जाता था। इसी कारण वे बड़े होकर एक कुशल राजनेता, आदर्शवादी, विचारक और महान लेखक भी बने।

कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ उनके मूल की वजह से उन्हें पंडित नेहरू के नाम से भी पुकारा जाता था।

पंडित जवाहर लाल नेहरू की आरंभिक शिक्षा- Jawaharlal Nehru Education

उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी जबकि पंडित नेहरू ने दुनिया के मशहूर स्कूलों और यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की थी। 15 साल की उम्र में 1905 में नेहरू जी को इंग्लैंड के हैरो स्कूल में पढ़ाई के लिए भेजा गया।

लॉ की पढ़ाई

2 साल तक हैरो में रहने के बाद जवाहर लाल नेहरू ने लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज से लॉ में एडमिशन लिया। इसके बाद उन्होनें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून शास्त्र की पढ़ाई पूरी की।

कैम्ब्रिज छोड़ने के बाद लंदन के इनर टेंपल में 2 साल पूरा करने के बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की।

आपको बता दें कि 7 साल में इंग्लैण्ड में रहकर इन्होनें फैबियन समाजवाद एवं आयरिश राष्ट्रवाद की जानकारी भी हासिल की। वहीं 1912 में वे भारत लौटे और वकालत शुरु की।

नेहरू जी का विवाह और बेटी इंदिरा गांधी का जन्म – Jawaharlal Nehru Marriage and Indira Gandhi Birth

भारत लौटने के 4 साल बाद 1916 में पं जवाहर लाल नेहरू जी का विवाह कमला कौर के साथ हुआ। कमला कौर दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार से तालुक्कात रखती थी।

1917 में उन्होनें इंदिरा प्रियदर्शिनी को जन्म दिया जो कि भारत के प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनी। जिन्हें हम इंदिरा गांधी के नाम से जानते हैं।

महात्मा गांधी के संपर्क में आए पंडित नेहरू ( राजनीति में प्रवेश ) – Jawaharlal Nehru Political Career

जवाहर लाल नेहरू 1917 में होमरूल लीग‎ – Indian Home Rule movement में शामिल हो गए। इसके 2 साल बाद 1919 में वे राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश कर गए। तभी उनका परिचय महात्मा गांधी से हुआ।

आपको बता दें कि ये वो दौर था जब महात्मा गांधी ने रौलेट अधिनियम – Rowlatt Act के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू जी, महात्मा गांधी जी के शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा आंदोलन से काफी प्रभावित हुए।

वे गांधी जी को अपना आदर्श मानने लगे यहां तक की नेहरू जी ने विदेशी वस्तुओं का त्याग कर दिया और खादी को अपना लिया इसके बाद उन्होनें 1920-1922 के गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भी साथ दिया इस दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।

‘पूर्ण स्वराज्य’ की मांग (राजनैतिक जीवन) – Jawaharlal Nehru Political Life

पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1926 से 1928 तक, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में सेवा भी की। कांग्रेस के वार्षिक सत्र का आयोजन साल 1928-29 में किया गया जिसकी अध्यक्षता उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने की।

उस सत्र के दौरान पंडित नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया था जबकि मोतीलाल नेहरू और अन्य नेता ब्रिटिश शासन के अंदर ही प्रभुत्व संपन्न राज्य चाहते थे। दिसम्बर 1929 में, लाहौर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया गया।

जिसमें जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुने गए। इसी सत्र के दौरान एक प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमें ‘पूर्ण स्वराज्य’ की मांग की गई।

26 जनवरी 1930 ( राजनीतिक सफर में संघर्ष ) – Jawaharlal Nehru Political Career after Republic Day

26 जनवरी 1930 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया। इस दौरान महात्मा गांधी ने में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन में सफलता हासिल हुई इसके साथ ही इस शांतिपूर्ण आंदोलन ने ब्रिटिश शासको को राजनीति में परिवर्तन लाने पर मजबूर कर दिया।

अब तक नेहरू जी को राजनीति का खासा ज्ञान प्राप्त हो चुका था और उन्होनें राजनीति में अपनी अच्छी पकड़ बना ली थी। इसके बाद 1936 और 1937 में जवाहर लाल नेहरू को कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया था।

यही नहीं उन्हें 1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी किया गया था और 1945 में वे जेल से रिहा किए गए थे। यही नहीं नेहरू जी ने गुलाम भारत को आजाद करवाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

साल 1947 में आजादी के समय उन्होंने अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्तालाप में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। इसके बाद से उनकी देशवासियों के सामने एक अलग छवि बनती गई और वे देशवासियों के लिए आदर्श बने गए।

महात्मा गांधी के काफी करीबी थे पंडित नेहरू

कहा जाता है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू गांधी जी के काफी करीबी दोस्त थे दोनों में पारिवारिक संबंध भी काफी अच्छे थे। ये भी कहा जाता है कि महात्मा गांधी के कहने पर ही पंडित नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया था।

वहीं पंडित नेहरू महात्मा गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित थे। पंडित नेहरू को महात्मा गांधी जी के शांतिपूर्ण आंदोलन से एक नई सीख और ऊर्जा मिलती थी यही वजह है कि वे गांधी जी के संपर्क में आने के बाद उनके हर आंदोलन में उनका साथ देते थे लेकिन नेहरू जी का राजनीति के प्रति धर्मनिरपेक्ष रवैया महात्मा गांधी जी के धार्मिक और पारंपरिक नजरिए से थोड़ा अलग था।

दरअसल गांधी जी प्राचीन भारत के गौरव पर बल देते थे जबकि नेहरू जी आधुनिक विचारधारा के थे।

भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में जवाहर लाल नेहरू – India First Prime Minister

साल 1947 जब गुलामी से आजादी मिली थी। देशवासी आजाद भारत में सांस ले रहे थे इसी वक्त देश की तरक्की के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था भी बनानी थी।

इसलिए देश में पहली बार प्रधानमंत्री के चुनाव हुए थे जिसमें कांग्रेस से प्रधानमंत्री के दावेदारी के लिए चुनाव किेए गए जिसमें लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और आचार्य कृपलानी को ज्यादा वोट मिले थे।

लेकिन गांधी जी के कहने पर पंडित जवाहर लाल नेहरू को देश का प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया इसके बाद पंडित नेहरू ने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद पर रहे और भारत की तरक्की के लिए प्रयासरत रहे।

प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए पंडित नेहरू ने देश के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए इसके साथ ही उन्होनें मजबूत राष्ट्र की नींव रखी और भारत को आर्थिक रूप से मजबूती भी देने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही उन्होनें भारत में विज्ञान और प्रोद्योगिकी के विकास को भी प्रोत्साहित किया।

आपको बता दें कि पंडित नेहरू आधुनिक भारत के पक्षधर थे इसलिए उन्होनें आधुनिक सोच पर भारत की मजबूत नींव का निर्माण किया और शांति एवं संगठन के लिए गुट-निरपेक्ष आंदोलन की रचना की। इसके साथ ही उन्होनें कोरियाई युद्ध, स्वेज नहर विवाद सुलझाने और कांगो समझौते में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जवाहर लाल नेहरू को मिले हुए सर्वोच्च सम्मान – Jawaharlal Nehru Award

जवाहर लाल नेहरू ने भारतवासियों के मन में जाातिवाद का भाव मिटाने और निर्धनों की सहायता करने के लिए जागरूकता पैदा की इसके साथ ही उन्होनें लोगों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान पैदा करने का काम भी किया।

इसके अलावा उन्होनें संपत्ति के मामले में विधवाओं को पुरुषों के बराबर हक दिलवाने समेत कई अनेक काम किए।

इसके अलावा भी नेहरू जी का पश्चिम बर्लिन, ऑस्ट्रिया और लाओस के जैसे कई अन्य विस्फोटक मुद्दों के समाधान में समेत कई समझौते और युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिसके लिए उन्हें 1955 में सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

लेखक के रूप में पंडित जवाहर लाल नेहरू – Jawaharlal Nehru as a Writer

पंडित जवाहर लाल नेहरू की एक अच्छे राजनेता और प्रभावशाली वक्ता ही नहीं बल्कि वे अच्छे लेखक भी थे। उनकी कलम से लिखा हुआ हर एक शब्द सामने वाले पर गहरा असर डालता था इसके साथ ही लोग उनकी किताबें पढ़ने के लिए काफी उत्साहित रहते थे। उनकी आत्मकथा 1936 में प्रकाशित की गई थी।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की क़िताबे – Jawaharlal Nehru Books

भारत और विश्व

सोवियत रूस

विश्व इतिहास की एक झलक

भारत की एकता और स्वतंत्रता

दुनिया के इतिहास का ओझरता दर्शन (1939) (Glimpses Of World History)

लोकप्रिय किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया (Discovery of India )

Discovery of India (डिस्कवरी ऑफ इंडिया) जिसको उन्होनें 1944 में अप्रैल-सितंबर के बीच अहमदनगर की जेल में लिखा था। इस किताब को पंडित नेहरू ने अंग्रेजी भाषा में लिखा था इसके बाद इस पुस्तक का हिंदी समेत कई भाषाओं में अनुवाद किया गया।

आपको बता दें इस किताब में नेहरू जी ने सिंधु घाटी सभ्‍यता से लेकर भारत की आज़ादी और भारत की संस्‍कृति, धर्म और संघर्ष का वर्णन किया है।

पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु ( 27 मई 1964 मृत्यु ) – Jawaharlal Nehru Death

पंडित जवाहर लाल नेहरू का चीन के साथ संघर्ष के थोड़े वक्त बाद भी स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। इसके बाद उन्हें 27 मई 1964 में दिल का दौरा पड़ा और वे इस दुनिया से हमेशा के लिए चल बसे।

पंडित जवाहर लाल नेहरू अपना प्यार बच्चों पर ही नहीं लुटाते थे बल्कि वे अपने देश के लिए भी समर्पित थे।

जवाहर लाल नेहरू राजनीति का वो चमकता सितारा थे जिनके ईर्द-गिर्द भारतीय राजनीति का पूरा सिलसिला घूमता है उन्होनें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनकर भारत देश को गौरन्वित किया है इसके साथ ही उन्होनें भारत की मजबूत नींव का निर्माण किया और शांति एवं संगठन के लिए गुट-निरपेक्ष आंदोलन की रचना की स्वाधीनता संग्राम के योद्धा के रूप में वह यशस्वी थे और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए उनका योगदान अभूतपूर्व था।

पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के विचार – Jawaharlal Nehru slogans in Hindi

  1. नागरिकता देश की सेवा में निहित है।
  2. संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है।
  3. असफलता तभी आती है जब हम अपने आदर्श, उद्देश्य, और सिद्धांत भूल जाते हैं।
  4. दूसरों के अनुभवों से लाभ उठाने वाला बुद्धिमान होता है।
  5. लोकतंत्र और समाजवाद लक्ष्य पाने के साधन है, स्वयम में लक्ष्य नहीं।
  6. लोगों की कला उनके दिमाग का सही दर्पण है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की खास बातें – Important things of Pandit Jawaharlal Nehru

  • पंडित नेहरू को आधुनिक भारत का शिल्पकार कहा जाता है।
  • पंडित नेहरु के जन्मदिन 14 नवम्बर को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

पंडित जवाहर लाल नेहरु के नाम सड़कें, स्कूल, यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल – Pandit Jawaharlal Nehru’s legacy

महापुरुष की मृत्यु भारत के लिए बड़ी क्षति थी इससे सम्पूर्ण देशवासियों को गहरा दुख पहुंचा था क्योकिं उन्होनें अपने अच्छे व्यक्तित्व की छाप हर किसी पर छोड़ी थी। वे लोकप्रिय राजनेता थे वहीं उनके कुर्बानियों और योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

इसलिए उनकी याद में कई सड़क मार्ग, जवाहर लाल नेहरु स्कूल, जवाहर लाल नेहरु टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरु कैंसर हॉस्पिटल आदि को बनाने की शुरुआत की गई।

पंडित जवाहर लाल नेहरू के मुख्य उद्देश्य उनके प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना, राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान करना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु करना थे।

इन्हीं संकल्पों और उद्देश्यों ने उन्हें महान पुरुष बनाया जो कि सभी के लिए प्रेरणादायी हैं।

एक नजर में जवाहरलाल नेहरु की जानकारी – Jawaharlal Nehru Short Biography

  • 1912 में इग्लंड से भारत आने के बाद जवाहरलाल नेहरु इन्होंने अपने पिताजीने ज्यूनिअर बनकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकील का व्यवसाय शुरु किया।
  • 1916 में राजनीती का कार्य करने के उद्देश से पंडित नेहरू ने गांधीजी से मुलाकात की। देश की राजनीती में भारतीय स्वतंत्र आंदोलन में हिस्सा लिया जाये, ऐसा वो चाहते थे।
  • 1916 में उन्होंने डॉ.अॅनी बेझंट इनके होमरूल लीग में प्रवेश किया। 1918 में वो इस संघटने के सेक्रेटरी बने। उसके साथ भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस के कार्य में भी उन्होंने भाग लिया।
  • 1920 में महात्मा गांधी ने शुरु किये हुये असहयोग आंदोलन में नेहरूजी शामील हुये। इस कारण उन्हें छह साल की सजा हुयी।
  • 1922 – 23 में जवाहरलाल नेहरूजी इलाहाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गये।
  • 1927 में नेहारुजीने सोव्हिएल युनियन से मुलाकात की। समाजवाद के प्रयोग से वो प्रभावित हुये और उन्ही विचारोकी ओर खीचे चले गए।
  • 1929 में लाहोर में राष्ट्रिय कॉग्रेस के ऐतिहासिक अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गये इसी अधिवेशन में कॉग्रेस ने पुरे स्वातंत्र्य की मांग की इसी अधिवेशन भारतको स्वतंत्र बनानेका निर्णय लिया गया इसके बाद ‘संपूर्ण स्वातंत्र्य’ का संकल्प पास किया गया।
  • यह फैसला पुरे भारतमे पहुचाने के लिए 26 जनवरी 1930 यह दिन राष्ट्रीय सभा में स्थिर किया गया। हर ग्राम में बड़ी सभाओका आयोजन किया गया। जनता ने स्वातंत्र्य के लिये लढ़नेकी शपथ ली इसी कारन 26 जनवरी यह दिन विशेष माना जाता है।
  • 1930 में महात्मा गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरु किया जिसमे नेहरुजीका शामील होना विशेष दर्जा रखता था।
  • 1937 में कॉग्रेस ने प्रातीय कानून बोर्ड चुनाव लढ़नेका फैसला लिया और बहुत बढ़िया यश संपादन किया जिसका प्रचारक भार नेहरुजी पर था।
  • 1942 के ‘चले जाव आंदोलन’ -Quit India Movement को भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में विशेष दर्जा है। कॉंग्रेस ने ये आंदोलन शुरु करना चाहिये इस लिये गांधीजी के मन का तैयार करने के लिए पंडित नेहरु आगे आये। उसके बाद तुरंत सरकारने उन्हें गिरफ्तार करके अहमदनगर के जैल कैद किया। वही उन्होंने ‘ऑफ इंडिया’ ये ग्रंथ लिखा।
  • 1946 में स्थापन हुये अंतरिम सरकार ने पंतप्रधान के रूप नेहरु को चुना। भारत स्वतंत्र होने के बाद वों स्वतंत्र भारत के पहले पंतप्रधान बने। जीवन के आखीर तक वो इस पद पर रहे। 1950 में पंडित नेहरु ने नियोजन आयोग की स्थापना की।

पंडित जवाहरलाल नेहरु – Jawaharlal Nehru उर्फ़ चाचा नेहरु – Chacha Nehru ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी थी। वे सतत भारत को आज़ाद भारत बनाने के लिए ब्रिटिशो के विरुद्ध लड़ते रहे। एक पराक्रमी सफल नेता साबित हुए। वे हमेशा गांधीजी के आदर्शो पर चलते थे। उनका हमेशा से यह मानना था की,

 “असफलता तभी आती है जब हम अपने आदर्श, उद्देश और सिद्धांत भूल जाते है।”