नोबेल विजेता मलाला योसुफ़जाई की जीवनी

By | April 20, 2019

नोबेल विजेता मलाला योसुफ़जाई की जीवनी

नोबेल विजेता मलाला योसुफ़जाई की जीवनी / Malala Yousafzai Biography In Hindi

नोबेल विजेता मलाला योसुफ़जाई की जीवनी

मलाला योसुफ़जाई लडकियों की पढाई के हक्क के लिये लड़ने वाली पाकिस्तानी कार्यकर्त्ता है और साथ ही वहपुरस्कार प्राप्त करने वाली सबसे युवा शक्सियत है. विशेष रूप से वह महिलाओ के शिक्षा के हक्क की वकालत करने के लिये जानी जाती है, जो उसने पकिस्तान के अपने स्थानिक गाव स्वाट वैली में की थी, जहा तालिबान ने उस समय महिलाओ का स्कूल जाना बंद कर दिया था. तभी से युसूफजाई की वह छोटी सी वकालत आज अंतर्राष्ट्रीय अभियान बन गया है.

मलाला का परिवार अपनी स्थानिक जगहों पर स्कूल चलाता है. 2009 के शुरू में, जब मलाला 11-12 साल की ही थी तो उसने उसने बीबीसी को एक ब्लॉग लिखकर बताया की उनका जीवन तालिबान के व्यापार में फसा हुआ है, उन्होंने बताया की तालिबान स्वाट वैली को हथियाना चाहते है. उसी साल गर्मियों में जर्नलिस्ट एडम बी. एलिक ने एक पाकिस्तानी मिलिट्री के तौर पर न्यू यॉर्क टाइम्स की एक डाक्यूमेंट्री बनायी. योसुफ़जाई के इस अभियान की प्रख्याति धीरे-धीरे बढती गयी, वह प्रिंट और टेलीविज़न पर इंटरव्यू भी देने लगी थी. इसके साथ ही इतनी कम आयु में ही साउथ अफ्रीका के कार्यकर्त्ता डेस्मंड टूटू ने इंटरनेशनल चिल्ड्रेन पीस प्राइज के लिये उनका नामनिर्देशन किया गया था.

9 अक्टूबर 2012 की दोपहर को योसुफ़जाई उत्तरी पाकिस्तानी जिले स्वाट की स्कूल बस में चढ़ी. एक गनमैन में उनसे उनका नाम पूछा, और उनकी तरफ पिस्तौल भी दिखाई और तीन गोलिया चलाई. एक गोली योसुफ़जाई के सिर के बायीं तरफ लगी, और एक उनके कंधे पर लगी. गनमैन ने तेज़ी से उनपर हमला किया लेकिन वह पूरी तरह से अचेत हो चुकी थी और गोलिया लगने के कारण उनकी हालत और भी ख़राब हो गयी थी. लेकिन जब उन्हें जल्दी से स्वास्थलाभ के इरादे से इंग्लैंड में बिर्मिंघम के क्वीन एलिज़ाबेथ हॉस्पिटल में ले जाया गया तो उनकी हालत में थोडा सुधार आया.

12 अक्टूबर को 50 लोगो के इस्लामिक पादरियों के समूह ने पकिस्तान में जिसने मलाला को मारने की कोशिश की उसके खिलाफ फतवा जारी किया लेकिन तालिबानियों पर इसका कोई असर नही हुआ वे मलाला और उनके पिता जियाउद्दीन योसुफ़जाई को मारने की लगातार कोशिशे करते रहे. बार-बार मलाला और उनके परिवार पर होते हुए हमलो को देख योसुफ़जाई के परिवार को राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला. डच वेल्ले ने जनवरी 2013 में यह लिखा की योसुफ़जाई “विश्व की सबसे प्रसिद्धि कम उम्र की महिला है”, योसुफ़जाई को सम्मानित करते हुए यूनाइटेड नेशन के विशेष दूतो ने ग्लोबल एजुकेशन के लिए UN याचिका को योसुफ़जाई का नाम दिया. जिसमे यह संबोधित किया गया था की 2015 के अंत तक उनके स्थानिक गाव के हर बच्चे को पढने के लिये स्कूल भेजा जायेगा. इससे पकिस्तान में सभी को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार भी मिला.

टाइम्स पत्रिका के 2013, 2014 और 2015 के संस्करणों में योसुफ़जाई को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगो की सूचि में भी शामिल किया गया. वह पाकिस्तान का पहली नेशनल यूथ पीस प्राइज प्राप्त करने वाली महिला है. उसी साल जुलाई में मलाला ने यूनाइटेड नेशन के मुख्य कार्यालय में वैश्विक स्तर पर शिक्षा पर भाषण दिया और अक्टूबर में कनाडा सरकार ने योसुफ़जाई को कनाडा की नागरिकता स्वीकार करने का आमंत्रण भी दिया. फरवरी 2014 को वर्ल्ड चिल्ड्रेन प्राइज अवार्ड के लिये स्वीडन में उनका नामनिर्देशन किया गया.

क्योकि योसुफ़जाई बच्ची को शिक्षा का हक्क दिलाने के लिये ही लड़ रही थी. 2015 में UN में किये गये अभियान के दौरान वाटसन का भाषण सुनकर उन्होंने अपनेआप को नारीवादी कहना शुरू किया. मई 2014 में योसुफ़जाई को किंग्स कॉलेज, हैलिफैक्स द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि दी गयी. इसके साथ ही 2014 में कैलाश सत्यार्थी के साथ योसुफ़जाई को भी नोबेल पुरस्कार का सह-हकदार माना गया. और 2014 को ही नोर्वे में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह पुरस्कार दिया गया. पुरस्कार मिलते ही सभागृह में उपस्थित सभी लोगो ने खड़े होकर तालिया बजाना शुरू की. 17 वर्ष की आयु में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली मलाला दुनिया की सबसे कम उम्र वाली नोबेल विजेता बन गयी.

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